अक्टूबर महीने के साथ ही रबी सीजन की शुरुआत हो गई है। खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेत खाली होते ही किसान अगली फसल की तैयारी में जुट गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेत खाली होते ही बुवाई की तैयारी शुरू कर दें, ताकि मिट्टी में मौजूद नमी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। इस बार मौसम में अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को मेड़-नाली पद्धति, ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर देना चाहिए। इससे मिट्टी की नमी बनाए रखने के साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
टमाटर, बैंगन, मिर्च और फूलगोभी की रोपाई का समय
सब्जियों की खेती करने वाले किसान टमाटर, बैंगन, मिर्च और फूलगोभी की तैयार नर्सरी के पौधों की रोपाई कर सकते हैं। जिन किसानों ने अभी तक नर्सरी तैयार नहीं की है, वे अपनी फसल और क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्मों का चयन कर समय से नर्सरी तैयार करें। खेत तैयार करते समय मिट्टी में पर्याप्त नमी और खाद की उपलब्धता का ध्यान रखना जरूरी है।
मेड़-नाली पद्धति से बचाएं खेत की नमी
मौसम में बदलाव और बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को रबी सीजन में भी मेड़-नाली पद्धति अपनानी चाहिए। इसके साथ ड्रिप सिंचाई का उपयोग करने से पानी की बचत की जा सकती है। खेत में पुआल, सूखी घास और दूसरे फसल अवशेषों से प्राकृतिक मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। कम बारिश होने पर यह तकनीक मिट्टी को जल्दी सूखने से बचाती है। वहीं, जैविक पदार्थों के सड़ने से मिट्टी में कार्बनिक तत्व बढ़ाने में मदद मिलती है।
खेत तैयार करने के लिए करें जैविक खाद का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार अल नीनो के प्रभाव और मौसम की अनिश्चितता के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश, जबकि कुछ जगहों पर कम बारिश देखने को मिली है। ऐसे में किसानों को खेत की स्थिति और मिट्टी में मौजूद नमी के अनुसार अगली फसल की तैयारी करनी चाहिए।
उड़द और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेत में कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी तैयार करें। इसके बाद खेत की जरूरत के अनुसार निराई-गुड़ाई और अन्य जरूरी कृषि कार्य करें। खेत में जैविक खाद के इस्तेमाल पर भी ध्यान दें। कृषि वैज्ञानिकों ने प्रति हेक्टेयर करीब 50 क्विंटल गोबर की खाद या 10 से 20 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। इसके साथ फसल की जरूरत और मिट्टी की जांच के आधार पर फास्फोरस, पोटाश और नाइट्रोजन का संतुलित इस्तेमाल करें।
ड्रिप से दें खाद और पानी
सब्जियों की खेती में ड्रिप सिंचाई के जरिए जरूरत के अनुसार पानी और घुलनशील उर्वरक दिए जा सकते हैं। इससे पानी और खाद का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलती है। किसानों को उर्वरकों का इस्तेमाल फसल की अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए। प्राकृतिक मल्चिंग को प्राथमिकता देने से प्लास्टिक मल्चिंग पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान खेत खाली होते ही अगली फसल की तैयारी शुरू कर दें। सही समय पर रोपाई, मिट्टी की नमी का संरक्षण, संतुलित खाद प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर किसान रबी सीजन में बेहतर उत्पादन पाने और खेती की लागत घटाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
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