छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीद के नियमों को सख्त कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। अब किसानों को टोकन में दर्ज मात्र के बराबर ही धान लेकर खरीद केंद्र आना होगा। अगर किसान टोकन से कम धान लेकर पहुंचता है, तो उसके बचे हुए धान का रकबा निरस्त कर दिया जाएगा। इस तरह किसान उस रकबे के हिस्सा का दोबारा टोकन नहीं कटवा सकेंगे।
बायोमीट्रिक सत्यापन और रियल टाइम एंट्री से रुकेगा फर्जीवाड़ा
एक उच्चस्तरीय बैठक में धान खरीदी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यमों से अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार, फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए इस बार बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। खरीद केंद्र पर अंगूठे के निशान या आंखों के स्कैन से किसान की पहचान सत्यापित होने के बाद ही धान खरीदा जाएगा।
प्रशासन के अनुसार, खरीदी का पूरा रिकॉर्ड रियल टाइम डेटाबेस में तुरंत दर्ज होगा, जिससे बाद में कोई नया ब्योरा जोड़ने की गुंजाइश नहीं बचेगी। इस बार सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर कॉमन ग्रेड धान 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान 2,461 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि केंद्रों पर किसानों का सत्यापन निष्पक्ष और तेजी से किया जाए।
टोकन आवंटन के नए नियम और रकबा निरस्त होने की शर्तें
नई व्यवस्था के तहत किसानों के लिए टोकन के सख्त नियम तय किए गए हैं। सरकार के अनुसार, दो एकड़ तक की भूमि वाले किसानों को एक टोकन दिया जाएगा। वहीं, 10 एकड़ तक अधिकतम एक टोकन और इससे ज्यादा रकबे वाले किसानों को तीन टोकन प्राप्त होंगे। नियम के मुताबिक, दो टोकन होने पर धान की मात्रा 50-50 प्रतिशत बांटी जाएगी, जबकि तीन टोकन होने पर यह अनुपात 33-33-34 प्रतिशत रखा जाएगा।
प्रशासन ने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी किसान ने चार एकड़ जमीन के लिए 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से 84 क्विंटल धान बेचने का टोकन कटवाया है, लेकिन वह केंद्र पर सिर्फ 63 क्विंटल धान लेकर पहुंचता है, तो बाकी 21 क्विंटल यानी एक एकड़ का रकबा निरस्त हो जाएगा। इसके अलावा, तय तारीख पर केंद्र न पहुंचने पर अगले दिन सॉफ्टवेयर टोकन डिलीट कर देगा। सरकार के अनुसार, किसान को दोबारा टोकन जारी कराने का सिर्फ एक मौका मिलेगा। दूसरी बार भी टोकन डिलीट होने पर संबंधित रकबा हमेशा के लिए निरस्त हो जाएगा। कुल टोकन में से 70 फीसदी मोबाइल एप से और 30 फीसदी समितियों के जरिए जारी किए जाएंगे।
एग्रीस्टैक प्रणाली से होगी ऑनलाइन निगरानी, रायपुर से रहेगा नियंत्रण
एक ही जमीन पर दोबारा धान बेचने और धान की रिसाइक्लिंग जैसी धांधलियों को रोकने के लिए सरकार एग्रीस्टैक आधारित पंजीकरण व्यवस्था लागू कर रही है। सरकार के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से किसान की अलग-अलग गांवों में दर्ज जमीन की पूरी जानकारी सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। जैसे ही किसी खसरे पर टोकन जारी होगा, सॉफ्टवेयर उस पर टिक मार्क लगा देगा। इसके बाद किसान उसी जमीन का दोबारा उपयोग कर धान नहीं बेच पाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी नई और डिजिटल व्यवस्था का सीधा नियंत्रण राजधानी रायपुर से किया जाएगा।