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Rashtriya Saras Mela: सरस मेले में महिलाओं को मिली ग्लोबल बाजार की ट्रेनिंग, विदेशों तक पहुंचेगा देसी सामान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 24 Oct 2026 05:58 PM IST
सार

राष्ट्रीय सरस मेले में 90 SHG महिलाओं को निर्यात मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी गई। जानें कैसे मिलेट्स, मसाले, हथकरघा और हस्तशिल्प के उत्पाद विदेशी बाजारों तक पहुंच सकते हैं।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री देश के साथ-साथ विदेशों में बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित राष्ट्रीय सरस मेले में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) के मार्केटिंग सेंटर ने निर्यात से जुड़ी बारीकियों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में देश के अलग-अलग राज्यों से आईं 90 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और 35 राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को अपने उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग करने, नए खरीदारों तक पहुंच बनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाने के लिए तैयार करना था। प्रशिक्षण में बताया गया कि सही पैकेजिंग, उत्पाद की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार की मांग को समझकर महिलाएं अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकती हैं।

विजयवाड़ा में 31 अक्टूबर तक चल रहा सरस मेला
राष्ट्रीय सरस मेला 13 से 31 अक्टूबर 2026 तक विजयवाड़ा में आयोजित किया जा रहा है। यह दिल्ली-एनसीआर के बाहर आयोजित होने वाला पहला राष्ट्रीय सरस मेला है। इसका आयोजन ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत किया गया है। इसमें आंध्र प्रदेश की ग्रामीण गरीबी उन्मूलन संस्था (SERP) का भी सहयोग है।

मेले में देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से करीब 1,500 महिला उद्यमी हिस्सा ले रही हैं। यहां 650 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें हथकरघा, हस्तशिल्प, प्राकृतिक खाद्य पदार्थ, प्रसंस्कृत उत्पाद और पारंपरिक कला से जुड़ी चीजें प्रदर्शित की जा रही हैं। इस मेले के जरिए महिलाओं को अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने और कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

निर्यात में आने वाली चुनौतियों की दी जानकारी
‘स्वयं सहायता समूह के उत्पादों की निर्यात मार्केटिंग: चुनौतियां और अवसर’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण में निर्यात विशेषज्ञ चिंतलापुडी मल्लेश्वर राव ने महिलाओं को जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान विदेशी खरीदारों की पहचान करने, बिचौलियों पर निर्भरता घटाने, उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और बेहतर पैकेजिंग व ब्रांडिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा निर्यात के लिए जरूरी पंजीकरण, प्रमाणपत्र, दस्तावेज, माल की ढुलाई और वित्तीय जरूरतों के बारे में भी बताया गया।

इन उत्पादों की विदेशों में है संभावना
प्रशिक्षण में बताया गया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कई तरह के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
  • जैविक और रसायन-मुक्त उत्पाद
  • मोटे अनाज यानी मिलेट्स से बने खाद्य पदार्थ
  • मसाले
  • हथकरघा से बने कपड़े
  • हस्तशिल्प और हाथ से बने उत्पाद

महिलाओं के पारंपरिक हुनर, स्थानीय संस्कृति और उत्पादों की खास पहचान को विदेशी बाजार में उपयोगी माना गया। प्रशिक्षण में सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और निर्यात कारोबारियों के माध्यम से उत्पाद बेचने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

सरकारी योजनाओं और निर्यात केंद्रों की जानकारी
कार्यक्रम में जिला निर्यात केंद्रों (District Export Hubs), निर्यात संवर्धन परिषदों और केंद्र व राज्य सरकार की संबंधित योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। महिलाओं को सलाह दी गई कि वे पहले अपने उत्पादों की मांग और बाजार को समझें। इसके बाद छोटे स्तर पर निर्यात के ऑर्डर लेकर धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार करें।

प्रशिक्षण में एनआईआरडीपीआर के सहायक निदेशक चिरंजी लाल कटारिया, मार्केटिंग सेंटर के शोध अधिकारी सुधीर कुमार सिंह, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के राष्ट्रीय मिशन प्रबंधक राजीव सिंघल और आंध्र प्रदेश SERP के निदेशक डॉ. शिवशंकर प्रसाद भी शामिल हुए।

लखपति दीदी अभियान को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण से उन्हें अपने उत्पादों की मार्केटिंग बेहतर करने और नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे उनके कारोबार को बढ़ाने के नए अवसर बन सकते हैं। स्वयं सहायता समूहों को बाजार से जोड़ने, डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा देने और निर्यात से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने जैसी पहल से महिलाओं की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह प्रयास केंद्र सरकार के लखपति दीदी अभियान और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य से भी जुड़ा है।
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