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पारंपरिक हल-बैल से ड्रिप इरिगेशन तक : पहले कृषि संग्रहालय में दिखेगा खेती का पूरा सफर, जानें उद्घाटन कब होगा?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 24 Oct 2026 05:54 PM IST
सार

  • रांची में झारखंड का पहला कृषि संग्रहालय बनकर तैयार।
  • 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर उद्घाटन की तैयारी।
  • प्राचीन खेती से आधुनिक कृषि तकनीकों तक की जानकारी।
  • पॉलीहाउस, ड्रिप इरिगेशन और जैविक खेती के मॉडल।
  • वेस्ट धातु से बनाई जा रही किसान की आकर्षक प्रतिमा।

झारखंड के पहले कृषि संग्रहालय में दिखेगा खेती का पूरा सफर।
झारखंड के पहले कृषि संग्रहालय में दिखेगा खेती का पूरा सफर। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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खेती के इतिहास और वर्तमान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। झारखंड की राजधानी रांची में प्रदेश का पहला कृषि संग्रहालय निर्माण के चरण में है। जानकारी के अनुसार, 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर कृषि भवन के पास स्थित कृषि निदेशालय परिसर की लक्ष्मी निवास कोठी में बन रहे इस संग्रहालय का उद्घाटन हो सकता है।

कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज के अनुसार, लोकार्पण की तारीख अभी पूरी तरह से तय नहीं हुई है, लेकिन पूरी उम्मीद है कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि मंत्री या सीएम इसका उद्घाटन करेंगे। यह संग्रहालय कृषि विज्ञान की पढ़ाई कर रहे छात्रों के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए भी बहुत ही फायदेमंद साबित होगा।

एक ही जगह दिखेगी पुरानी और नई खेती की झलक
इस संग्रहालय के अंदर पुराने समय की पारंपरिक खेती से लेकर आज के आधुनिक युग में कृषि क्षेत्र में आए सभी बदलावों और उपकरणों को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें पठारी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाकर की जाने वाली खेती के तरीके और खेती के साथ पशुपालन (जानवर पालने) को जोड़कर किसानों की आर्थिक तरक्की का मॉडल भी दिखाया जा रहा है।

इसके अलावा, किसानों को नई जानकारी देने के लिए यहां पॉलीहाउस फार्मिंग, आर्गेनिक फार्मिंग, एकीकृत कृषि प्रणाली, आर्गेनिक खाद बनाने की तकनीक और ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) जैसी आधुनिक तकनीकों के जीवंत (लाइव) मॉडल भी तैयार किए जा रहे हैं।

बोकैर धातु से बन रही किसान की मूर्ति
संग्रहालय परिसर में प्रवेश करते ही आने वाले लोगों को बेकार धातु से तैयार की गई एक किसान की बहुत ही आकर्षक मूर्ति दिखाई देगी। इस कलाकृति में गेहूं की बाली और खेती के अलग-अलग औजारों के साथ अन्नदाता (किसान) का रूप बनाया जा रहा है, जो पूरा होने पर काफी सुंदर दिखेगा। इस संग्रहालय के शुरू होने से, यहां आने वाले लोग झारखंड के ऐतिहासिक कृषि इतिहास को समझने के साथ-साथ आधुनिक खेती की कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकेंगे।


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