भारतीय खाद्य निगम की साप्ताहिक नीलामी के जरिए आटा मिलों जैसे बड़े थोक खरीदारों को खुले बाजार में गेहूं बेचे जाने से कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है। यह बात व्यापार जानकारों के हवाले से सामने आई है।
एफसीआई की चौथी साप्ताहिक ई-नीलामी में गेहूं के औसत भाव में 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की कमी दर्ज की गई है। पिछले हफ्ते जहां बाजार में गेहूं 3,100 से 3,150 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, वहीं अब घटकर 2,850 से 2,900 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में आ गया है।
नीलामी में कोटा दोगुना, 30 लाख टन गेहूं बेचने का लक्ष्य
घटते स्टॉक के बीच बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने बुधवार को आयोजित साप्ताहिक टेंडर में बेचे जाने वाले गेहूं की मात्रा दोगुनी कर 2 लाख टन कर दी थी। इस नीलामी में खरीदारों ने 1 लाख 70 हजार टन गेहूं खरीदने के लिए बोली लगाई। इससे पहले 28 अक्टूबर को हुई नीलामी में सरकार द्वारा पेश किए गए 1 लाख टन गेहूं में से 99,316 टन की बिक्री हुई थी।
जानकारों का कहना है कि ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत आने वाले हफ्तों में भी कीमतें इसी स्तर पर स्थिर रहने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में चार नीलामियों के जरिए एफसीआई अब तक करीब 5 लाख टन गेहूं बेच चुका है, जबकि वित्त वर्ष 2027 के अंत तक कुल 30 लाख टन अनाज खुले बाजार में बेचने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वित्त वर्ष 2026 में निगम थोक खरीदारों को केवल 6 लाख 30 हजार टन गेहूं ही बेच सका था।
बाजार में गेहूं की पर्याप्त आवक और तय दरें
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने बताया कि बाजार में गेहूं की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है और कीमतें स्थिर होने लगी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पिछले टेंडर में उठाए गए अनाज और मौजूदा बाजार भावों को देखते हुए सरकार खुले बाजार में बिकने वाले गेहूं की मात्रा धीरे-धीरे और बढ़ा सकती है।
सरकार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं (FAQ) का आरक्षित मूल्य 2,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। वहीं, थोड़ी कम गुणवत्ता वाले गेहूं (URS) का भाव 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
सरकारी गोदामों में भारी स्टॉक और न्यूनतम समर्थन मूल्य
आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर के लिए तय 2 करोड़ 5 लाख टन के बफर और रणनीतिक नियमों के मुकाबले एफसीआई के केंद्रीय पूल में इस समय 4 करोड़ 47 लाख टन से अधिक गेहूं उपलब्ध है। व्यापारियों का कहना है कि राशन वितरण व्यवस्था (PDS) और बफर स्टॉक की आवश्यकताएं पूरी करने के बाद भी सरकार के पास 2 करोड़ टन से अधिक का अतिरिक्त गेहूं मौजूद है। वहीं, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत हर साल लगभग 2 करोड़ से 2 करोड़ 20 लाख टन गेहूं बांटा जाता है।
एफसीआई और राज्य एजेंसियों ने 2026-27 के रबी सत्र के दौरान किसानों से 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 3 करोड़ 50 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। इसके साथ ही सरकार ने आने वाले 2027-28 विपणन सत्र (अप्रैल-जून) के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर दिया है।
उपभोक्ता मामले विभाग के मूल्य निगरानी सेल के अनुसार, गुरुवार को खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत 32.6 रुपये प्रति किलो रही, जो पिछले साल के स्तर के बराबर ही है। इसके अलावा, सितंबर 2026 में गेहूं की खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 1.64 प्रतिशत दर्ज की गई।