इंडियन पोल्ट्री इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की तरफ से 25 से 27 नवंबर तक 18वें पोल्ट्री इंडिया एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 120 देशों के लगभग 51 हजार से ज्यादा पेशेवर लोग और 550 से अधिक उपकरण बनाने वाली कंपनियां हिस्सा लेंगी। यह आयोजन मुर्गी पालन करने वाले किसानों, चारा बनाने वालों, पशु चिकित्सकों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक बड़ा मंच साबित होगा, जहां वे इस क्षेत्र के नए विकास पर चर्चा करेंगे।
नई तकनीक और बीमारियों से बचाव पर रहेगा जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए IPEMA-पोल्ट्री इंडिया के अध्यक्ष उदय सिंह बायस ने बताया कि इस प्रदर्शनी में मुर्गी पालन में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इसमें हैचरी, मुर्गियों के लिए चारा बनाने, फार्म के सही रखरखाव, मुर्गियों के आवास और उन्हें बीमारियों से बचाने के तरीके शामिल होंगे। इसके अलावा, अंडे की प्रोसेसिंग और फार्म से निकलने वाले कचरे के सही प्रबंधन पर भी खास जोर रहेगा। उन्होंने बताया कि इस बड़े एक्सपो का उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल करेंगे।
24 नवंबर को मनाया जाएगा 'पोल्ट्री नॉलेज डे'
एक्सपो से ठीक एक दिन पहले, 24 नवंबर को 'पोल्ट्री नॉलेज डे' (मुर्गी पालन ज्ञान दिवस) का आयोजन किया जाएगा, जिसकी शुरुआत भी केंद्रीय राज्य मंत्री करेंगे। इस खास दिन पर वैज्ञानिक, सरकारी नीति बनाने वाले अधिकारी और पशु चिकित्सक एक साथ बैठेंगे। ये विशेषज्ञ मुर्गियों के स्वास्थ्य, उनके खान-पान (पोषण), फार्म में मशीनों के उपयोग और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) जैसी नई तकनीकों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान मुर्गी पालकों के सामने आने वाली रोजमर्रा की व्यावहारिक चुनौतियों और फार्म की पैदावार बढ़ाने के तरीकों पर भी बात की जाएगी। उदय सिंह बायस के अनुसार, यह प्रदर्शनी किसानों को नई तकनीक समझने में मदद करेगी और भारतीय तथा विदेशी कंपनियों को साथ मिलकर काम करने का मौका देगी।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक है भारत
भारत का मुर्गी पालन उद्योग आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2023-24 में भारत ने 142.77 अरब अंडों का उत्पादन किया है। इसी के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक देश बना हुआ है।
अध्यक्ष उदय सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र न केवल मुर्गियां पालने वाले किसानों को, बल्कि चारा बनाने, माल ढोने, प्रोसेसिंग और उपकरण सप्लाई से जुड़े व्यवसायों को भी कमाई का मौका दे रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, मुर्गी पालन के इस पूरे सेक्टर से करीब 50 से 60 लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।