कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने गुरुवार को घोषणा की है कि राज्य सरकार प्रत्येक पात्र किसान को 5,000 रुपये तक की सूखा राहत राशि देगी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए भेजी जा रही है। पहली किस्त के तौर पर किसानों को 2,500 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि शेष 2,500 रुपये आने वाले 15 से 20 दिनों के भीतर वितरित कर दिए जाएंगे।
यादगीर से शुरुआत, 15 और जिलों में तैयारी तेज
मुख्यमंत्री ने पहले चरण में यादगीर जिले के 1,06,462 किसानों के लिए 17.43 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने का ऐलान किया है। सरकार के अनुसार, राज्य के 15 अन्य जिलों के किसानों के लिए भी भुगतान की फाइलें तेजी से तैयार की जा रही हैं। इन जिलों में उत्तर कन्नड़, कोलार, कोप्पल, चामराजनगर, धारवाड़, बल्लारी, बीदर, बेंगलुरु शहरी, हावेरी, बेंगलुरु दक्षिण, दावणगेरे, दक्षिण कन्नड़, कलबुर्गी, मांड्या और विजयनगर शामिल हैं।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसानों की स्थिति सुधारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। भले ही यह राहत राशि नुकसान की पूरी भरपाई न कर सके, लेकिन इससे किसानों को कुछ सहारा जरूर मिलेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जरूरी फंड मिलते ही पात्रता के आधार पर बची हुई राहत राशि एकमुश्त किस्त में जारी कर दी जाएगी।
57.93 लाख हेक्टेयर में फसलें तबाह, 226 तालुका सूखाग्रस्त घोषित
संयुक्त फसल नुकसान आकलन रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में इस गंभीर सूखे के कारण 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। शिवकुमार ने बताया कि खेतों के स्तर पर की गई जांच और केंद्र के नियमों के आधार पर राज्य के 226 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने सूखे की गंभीरता पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा भीषण सूखा पहले कभी नहीं देखा गया और कृष्णा बांध को छोड़कर राज्य का कोई भी बांध नहीं भर पाया है। राज्य सरकार के अनुसार, सूखे से करीब 62,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसके लिए केंद्र सरकार से 22,400 करोड़ रुपये की राहत मांगी गई है। इस संबंध में प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा गया है और सभी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्र के पास ले जाने की योजना है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की तीन टीमें राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों का जायजा ले चुकी हैं।
बिजली और पानी का गहरा संकट, खर्च बढ़कर 30 हजार करोड़ पहुंचा
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सूखे के कारण पीने के पानी और बिजली की समस्या पर भी बात रखी। उन्होंने बताया कि सूखे के चलते खपत बढ़ने से किसानों को मुफ्त बिजली देने पर सरकार का खर्च 20,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, भारी खर्च के बावजूद मौजूदा स्थिति में किसानों को बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।