चक्रवात मुरासु का असर कमजोर पड़ने के बावजूद दक्षिण भारत में बारिश का दौर जारी रहने वाला है। बंगाल की खाड़ी से नमी वाली पूर्वी हवाएं तमिलनाडु के तट की ओर बढ़ रही हैं। इससे दक्षिण भारत के कई राज्यों में अगले छह दिनों तक बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश का अनुमान जताया है। वहीं, गुरुवार शाम से केरल और माहे में भी बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवात मुरासु का बचा हुआ कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर पूर्वी तेलंगाना और उससे सटे तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर पहुंच गया है। हालांकि, इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण अभी भी सक्रिय है। इसके कारण आने वाले दिनों में बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है।
तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में रविवार और सोमवार को कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। शुक्रवार को भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। इसके अलावा सोमवार से अगले तीन दिनों तक इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश जारी रह सकती है।
तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी शुक्रवार से अगले छह दिनों तक बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना में शुक्रवार और शनिवार को बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में चार दिनों तक तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी भी दी है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हुई भारी बारिश
मौसम विभाग का यह अनुमान पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश के बाद आया है। गुरुवार सुबह तक के 24 घंटों के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और तेलंगाना में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। वहीं, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई।
गुरुवार को चक्रवात मुरासु से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण पूर्वी तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बना हुआ था। इसके अलावा, अरब सागर में केरल और कर्नाटक के तट के पास पूर्वी हवाओं के साथ एक ट्रफ भी सक्रिय है। इन मौसमी गतिविधियों के कारण दक्षिण भारत में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
बंगाल की खाड़ी में फिर बन सकता है कम दबाव का क्षेत्र
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, चक्रवात मुरासु का असर खत्म होने के बाद भी बंगाल की खाड़ी में एक और मौसमी सिस्टम बनने की संभावना बनी हुई है। समुद्र का बढ़ा हुआ तापमान, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) का सकारात्मक चरण इस गतिविधि को बढ़ावा दे सकते हैं।
MJO बादलों, नमी और बारिश से जुड़ी एक मौसमी गतिविधि है, जो पूर्व दिशा में आगे बढ़ती है। यह कम दबाव का क्षेत्र और चक्रवाती सिस्टम बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकती है। फिलहाल हिंद महासागर के ऊपर इसकी सक्रियता मध्यम स्तर की है।
18 से 24 नवंबर के बीच नए सिस्टम की संभावना
मौसम के ज्यादातर मॉडल के अनुसार, अगले सात दिनों में MJO की सक्रियता बढ़ सकती है। हालांकि, इसके बाद इसकी ताकत को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। कुछ मॉडल इसके तेजी से कमजोर होने की बात कह रहे हैं, जबकि कुछ के मुताबिक इसकी सक्रियता धीरे-धीरे कम होगी।
मौसम के वैश्विक मॉडल बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती सिस्टम बनने के संकेत दे रहे हैं। अनुमान है कि 18 से 24 नवंबर के बीच बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र या डिप्रेशन बनने की 20 से 40 फीसदी संभावना है। हालांकि, इस अनुमान को लेकर अभी पूरी तरह सहमति नहीं है।
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