उत्तर भारत के कई राज्यों में 8 अक्टूबर से मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। IMD के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड और पंजाब-हरियाणा तक अगले कुछ दिनों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। पहाड़ों पर भारी बारिश और मैदानी इलाकों में तेज आंधी को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और खेती-किसानी पर पड़ सकता है।
पहाड़ी राज्यों की स्थिति को लेकर IMD के अनुसार, 8 और 10 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है, जबकि 9 और 11 अक्टूबर को छिटपुट बारिश हो सकती है। यहां 8 अक्टूबर को 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और 9-10 अक्टूबर को गरज के साथ बिजली गिरने की आशंका है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 8 से 14 अक्टूबर के बीच बारिश का दौर जारी रहेगा। IMD के अनुसार, उत्तराखंड में 8 और 9 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में 8 और 9 अक्टूबर को 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ तूफान आने और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
मैदानी राज्यों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 8 से 14 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बारिश होने के आसार हैं। IMD के अनुसार, पंजाब में 8 अक्टूबर को 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और 9-10 अक्टूबर को भी हवा की गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में 8 अक्टूबर को बिजली गिरने और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश को लेकर बुलेटिन में बताया गया है कि पश्चिमी यूपी में 8 और 9 अक्टूबर तथा पूर्वी यूपी में 8 से 10 अक्टूबर के बीच बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा, राजस्थान में भी 11 और 12 अक्टूबर को मौसम बदलेगा। पश्चिमी राजस्थान में 11-12 अक्टूबर और पूर्वी राजस्थान में 12 अक्टूबर को बारिश दर्ज की जा सकती है।
खराब मौसम के इस पूर्वानुमान को देखते हुए IMD ने किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बुलेटिन के अनुसार, भारी बारिश की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड के किसानों को धान, सोयाबीन, मक्का, अदरक, लहसुन, टमाटर और बाजरा जैसी फसलों के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि वे तैयार हो चुकी टमाटर, फ्रेंच बीन और आलू की फसल को साफ मौसम देखकर काट लें और सुरक्षित स्थानों पर भंडारित करें। वहीं, हिमाचल प्रदेश के किसानों को भी मक्का, अदरक और हल्दी के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और तैयार फसलों को सुरक्षित जगह पर रखने का सुझाव दिया गया है ताकि जलभराव से जड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे। आंधी और तेज हवाओं से बचने के लिए किसानों को कटी हुई फसलों को तिरपाल से ढकने और सब्जियों के पौधों को सहारा देने के लिए भी कहा गया है।