हरियाणा की मंडियों में अब तक सात लाख मीट्रिक टन से अधिक धान पहुंच चुका है। पारदर्शिता के लिए सभी खरीद केंद्रों पर जियो-फेंसिंग की गई है और फसल में नमी को देखते हुए कटाई पर विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
मंडियों में धान की आवक और खरीद का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। अब तक मंडियों में लगभग 7.35 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है, जिसमें से 2.57 लाख मीट्रिक टन फसल की खरीद पूरी कर ली गई है। किसानों की सहूलियत के लिए धान खरीद की यह प्रक्रिया 15 नवंबर तक सुचारू रूप से जारी रहेगी।
सरकार ने तय किए धान के अलग-अलग समर्थन मूल्य
सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार, किसानों को उनकी उपज का सही दाम देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि सामान्य धान के लिए एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। वहीं, बेहतर गुणवत्ता वाले 'ग्रेड-ए' धान के लिए किसानों को 2,461 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जाएगा।
खरीद में पारदर्शिता के लिए जियो-फेंसिंग और तय किए गए नए लक्ष्य
किसानों की सुविधा सुनिश्चित करने और खरीद प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश की सभी मंडियों और खरीद केंद्रों को जियो-फेंसिंग की सुविधा से लैस कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने इस बार हरियाणा से कुल 58 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को कस्टम-मिल्ड चावल के रूप में 32.5 लाख मीट्रिक टन चावल देने का भी लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें 10 प्रतिशत टूटे हुए चावल शामिल होंगे।
किसानों की सुविधा के लिए बुनियादी इंतजाम और कटाई पर धारा 163 लागू
मंडी में अपनी फसल लेकर आने वाले किसानों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मार्केटिंग बोर्ड) की तरफ से सभी मंडियों और खरीद केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा, फसल में नमी की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। धान में नमी के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, जिला प्रशासन ने धान की कटाई के संबंध में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (पाबंदी के आदेश) जारी कर दी है।