सूती धागे की कीमतों में उछाल को देखते हुए केंद्र सरकार इसके निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य लगाने पर विचार कर रही है। जानकारों का कहना है कि इस तरह घरेलू बाजार में सूती घागे की उपलब्धता को मजबूती देना और कपड़ा निर्माताओं को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से बचाना है। अमेरिका ने चीन के शिनजियांग इलाके से आने वाली कपास पर प्रतिबंध लागू किया है, जिस वजह से वैश्विक बाजार में इस धागे की कीमतों में तेजी आई है।
कीमतों में 60% की वृद्धि और उत्पादन में भारी गिरावट
कपड़ा मंत्रालय को सौंपे गए उद्योग के प्रस्ताव के अनुसार, 2026 की शुरुआत में जो धागा लगभग 250 रुपये प्रति किलो था, वह अब करीब 60 प्रतिशत बढ़कर 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इससे कपड़ा और परिधान बनाने वाली कंपनियों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
कपड़ा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके उत्पादन में लगातार गिरावट आई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में कपास का उत्पादन 3.25 करोड़ (32.522 मिलियन) गांठ था, जो 2024-25 में घटकर 2.97 करोड़ (29.724 मिलियन) और 2025-26 में 2.90 करोड़ (29.091 मिलियन) गांठ रह गया है। (कपास की एक गांठ का वजन 170 किलो होता है)। कपास की खेती का रकबा (क्षेत्रफल) भी 2023-24 के 1.26 करोड़ हेक्टेयर से घटकर 2025-26 में 1.14 करोड़ हेक्टेयर रह गया है।
भारतीय सूती धागे की मांग-निर्यात में उछाल
घरेलू उत्पादन घटने के बावजूद, विदेशों में भारत के कपास के धागे की मांग और निर्यात तेजी से बढ़ा है। उद्योग जानकारों के अनुसरा, आपूर्ति में कमी और विदेशों में बढ़ती मांग के कारण ही कीमतें बढ़ी हैं। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल धागे के निर्यात में भारी बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल में निर्यात 11.9% (98,046 टन), मई में 22.6% (1,02,951 टन), जून में 15.8% (96,661 टन) और जुलाई में सबसे अधिक 34.1% बढ़कर 1,15,021 टन हो गया।