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Watershed Planning: किसानों के लिए पानी बचाने की तैयारी, बेहतर होंगी वाटरशेड विकास योजनाएं

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 01:41 PM IST
सार

नई दिल्ली में वाटरशेड विकास को लेकर राष्ट्रीय तकनीकी समिति की बैठक हुई। इसमें राज्यों से जलग्रहण क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े साझा करने, जमीन और पानी की जानकारी को एक साथ इस्तेमाल करने और परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का समय 6 महीने से घटाकर 3 महीने करने पर जोर दिया गया।

नई दिल्ली में वाटरशेड विकास को लेकर राष्ट्रीय तकनीकी समिति की बैठक हुई।
नई दिल्ली में वाटरशेड विकास को लेकर राष्ट्रीय तकनीकी समिति की बैठक हुई। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने वाटरशेड यानी जलग्रहण क्षेत्र के विकास और प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति की बैठक की। बैठक 22 सितंबर को नई दिल्ली के NASC कॉम्प्लेक्स में REWARD कार्यक्रम के तहत हुई। इसमें वाटरशेड विकास को बेहतर बनाने, उपलब्ध आंकड़ों के इस्तेमाल और राज्यों के बीच जानकारी साझा करने पर चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता NRAA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने की। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भूमि संसाधन विभाग, ओडिशा और कर्नाटक सरकार के अधिकारियों के साथ कृषि विश्वविद्यालयों, IIT, शोध संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों और तकनीकी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में करीब 45 लोग शामिल हुए।

वाटरशेड से जुड़े आंकड़ों को साझा करने पर जोर
NRAA के CEO डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने कहा कि REWARD कार्यक्रम के तहत जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार किए जा रहे दावों और निष्कर्षों की सही तरीके से जांच जरूरी है। उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक सरकारों से वाटरशेड से जुड़ा डेटा और Decision Support System (DSS) सभी संबंधित पक्षों के साथ साझा करने को कहा। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर वाटरशेड विकास की योजनाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है।

जमीन और पानी की जानकारी को साथ जोड़ने की जरूरत
ICAR के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए.के. नायक ने वाटरशेड की बेहतर योजना के लिए Land Resource Inventory (LRI) और जल विज्ञान से जुड़ी जानकारी को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG) में किसी भी नतीजे तक पहुंचने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और तरीके को साफ तौर पर बताया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित जानकारी के लिए वेब पोर्टल जल्द विकसित करने की बात भी कही।

DPR बनाने का समय 6 से घटाकर 3 महीने करने का सुझाव
भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव नितिन खाड़े ने वाटरशेड परियोजनाओं की Detailed Project Report (DPR) तैयार करने में लगने वाले समय को कम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि DPR तैयार करने का समय छह महीने से घटाकर तीन महीने किया जा सकता है। इससे परियोजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों और विभागों के काम को एक साथ जोड़ने यानी कन्वर्जेंस पर भी ध्यान देने की बात कही।

भविष्य की वाटरशेड योजनाओं के लिए बनेगा आधार
बैठक की शुरुआत में डॉ. सुसमा सुधीश्री ने पिछली राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति की बैठक में लिए गए फैसलों पर हुई कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG) के दूसरे मसौदे में किए गए बदलावों की भी जानकारी दी।

उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों से वाटरशेड से जुड़े रिकॉर्ड किए गए आंकड़े NRAA और तकनीकी साझेदारों के साथ साझा करने को कहा। इन आंकड़ों का इस्तेमाल रिपोर्ट तैयार करने और राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने में किया जाएगा।

तैयार किए जा रहे ये राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG) देश में भविष्य की वाटरशेड विकास योजनाओं के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के वाटरशेड विकास घटक के तहत होने वाले कामों में उपयोग किया जाएगा।

क्या है REWARD कार्यक्रम?
REWARD का पूरा नाम Rejuvenating Watersheds for Agricultural Resilience through Innovative Development है। इसके तहत वाटरशेड विकास को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक, आंकड़ों और वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है।
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