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Bamboo cultivation: बांस की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, कार्बन क्रेडिट से भी कमाई का मौका

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 02:29 PM IST
सार

  • गुमला में 32 हेक्टेयर जमीन पर बांस लगाने का लक्ष्य
  • 24 हेक्टेयर निजी और 8 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर होगी खेती
  • बांस से फर्नीचर, हस्तशिल्प और कई उत्पाद बनाने की संभावनाएं
  • कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं से किसानों को अतिरिक्त कमाई का मौका

बांस की खेती
बांस की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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झारखंड के गुमला जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए बांस की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में 32 हेक्टेयर जमीन पर औद्योगिक बांस लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 24 हेक्टेयर निजी और आठ हेक्टेयर सरकारी जमीन शामिल है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है।

जिला उद्यान कार्यालय किसानों को बांस की उन्नत और ज्यादा उपयोगी प्रजातियों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। बांस तेजी से बढ़ने वाला पौधा है। इसके कारण इसे कई जगह ‘हरित सोना’ भी कहा जाता है।

फर्नीचर से लेकर खाने तक में उपयोग
बांस का इस्तेमाल फर्नीचर, हस्तशिल्प, घरेलू सामान और कई तरह के उत्पाद बनाने में होता है। लकड़ी और प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर भी बांस की मांग बढ़ रही है। किसान बांस की खेती के साथ इससे जुड़े उत्पाद बनाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। बांस की कोपलों से सब्जी और अचार बनाए जाते हैं। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे के काम भी आती हैं। बांस के घने पौधे पक्षियों को रहने और घोंसला बनाने के लिए जगह देते हैं।

कार्बन क्रेडिट से भी कमाई का रास्ता
बांस तेजी से बढ़ता है और वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने में मदद करता है। इसी वजह से बांस की खेती से जुड़े किसान कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं के जरिए अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए किसानों को किसी मान्य कार्बन परियोजना से जुड़ना होगा। खेती के दौरान कितना कार्बन सोखा गया, इसका वैज्ञानिक तरीके से आकलन और स्वतंत्र सत्यापन भी जरूरी होगा। छोटे किसानों के लिए एफपीओ या किसी परियोजना संचालक के माध्यम से सामूहिक रूप से ऐसी परियोजनाओं से जुड़ना आसान हो सकता है।

किसानों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
जिला उद्यान कार्यालय किसानों को बांस की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण भी दे रहा है। हाल ही में 14 किसानों और एक क्षेत्रीय कार्यकर्ता को पांच दिन का प्रशिक्षण दिया गया। रांची की छोटानागपुर क्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी के प्रशिक्षकों कीर्तिमान नाथ, अंजीत उरांव और सुकरा उरांव ने किसानों को बांस लगाने, पौधों की देखभाल, उन्नत प्रजातियों और बाजार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।

तकनीकी विशेषज्ञ विश्व दीपक कुमार सिंह के अनुसार, बांस से जुड़े उद्योगों की मांग बढ़ने से गांवों में नए कारोबार और रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इससे बांस आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
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