केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह के एक बयान ने आधार कार्ड और वोटर आईडी के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ देने को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पंचायती राज से जुड़े एक कार्यक्रम में ललन सिंह ने कहा था कि अब लाभार्थियों के भुगतान का आधार केवल आधार कार्ड नहीं रहेगा। इसके लिए बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ वोटर आईडी कार्ड के EPIC नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा।
उनके इस बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने आशंका जताई कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद ललन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचाना और बिचौलियों को इसका फायदा उठाने से रोकना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वशासन योजना (PM VGSY) के तहत प्रशिक्षण लेने वाले लोगों की पहचान EPIC नंबर और आधार के बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए सुनिश्चित की जाएगी।
ललन सिंह ने कार्यक्रम में क्या कहा था?
पंचायती राज से जुड़े कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने आधार कार्ड से जुड़ी व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अब लाभार्थियों को भुगतान करने का आधार केवल आधार कार्ड नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड बनाने वाली संस्थाएं हर गली में उपलब्ध हैं और कुछ ही मिनटों में आधार कार्ड बनवाया जा सकता है। ऐसे में केवल आधार कार्ड को पहचान का आधार नहीं माना जाएगा।
ललन सिंह ने कहा था, “अब लाभार्थियों के भुगतान का आधार आधार कार्ड नहीं रहेगा। सभी लाभार्थियों के भुगतान के लिए बायोमेट्रिक और EPIC नंबर, यानी उनके वोटर आईडी कार्ड का नंबर, आधार होगा और उसी के आधार पर भुगतान किया जाएगा।”
उनके इस बयान से यह संदेश गया कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के भुगतान में आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी के EPIC नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन को अहमियत दी जाएगी। इसी बयान को राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
मोदी सरकार के मंत्री का ऐलान - योजनाओं का लाभ अब आधार से नहीं, वोटर ID से तय होगा। साजिश बहुत गहरी है, इत्मीनान से समझिए। SIR के नाम पर करोड़ों नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं - रोका नहीं गया तो और भी काटे जाएंगे। ज़्यादातर नाम किनके? जो BJP के ख़िलाफ़ आक्रोश में हैं। वोटर लिस्ट एक निष्पक्ष चुनाव आयोग के हाथ में होनी चाहिए - मगर अब वो मोदी सरकार के कर्मचारी, ज्ञानेश कुमार के हाथ में है, जिसकी BJP के साथ मिलीभगत में वोट चोरी हमने सबूत के साथ पकड़ी है। तैयारी है ऐसी लिस्ट बनाने की जिसमें बहुमत हमेशा BJP का हो - और अब वही लिस्ट तय करेगी कि आपको योजना का पैसा मिलेगा या नहीं। कल जिसने भी ठाना कि BJP को हटाना है, तो चुन-चुन कर सबका नाम काटा जाएगा। नाम कटा - वोट गया। वोट गया - हक़ गया। और देखते ही देखते आप एक hijacked लोकतंत्र के अदृश्य नागरिक बन जाएंगे - जहां जनता सरकार नहीं चुनेगी, सरकार अपनी जनता चुनेगी। आज पंचायती राज की योजनाएं। कल राशन? पेंशन? मनरेगा? आवास? छात्रवृत्ति? आरक्षण? यह चुनाव जीतने की राजनीति नहीं, चुनाव चोरी का इंतज़ाम और सत्ता में बने रहने का स्थायी बंदोबस्त है। वोट देना आपका अधिकार है, शर्त नहीं। किसी ग़रीब की पेंशन उसके वोटर कार्ड की ग़ुलाम नहीं हो सकती। ये सिर्फ़ वोट चोरी नहीं - ये हक़ चोरी है। हम ये होने नहीं देंगे।
राहुल गांधी ने बताया ‘हक छीनने की साजिश’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ललन सिंह के बयान को लेकर एक्स पर लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के एक मंत्री ने घोषणा की है कि अब सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पात्रता आधार कार्ड से नहीं, बल्कि वोटर आईडी से तय होगी। राहुल ने इसे गंभीर और खतरनाक साजिश बताते हुए कहा कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। अगर इस प्रक्रिया को नहीं रोका गया तो आगे और भी नाम काटे जा सकते हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटेंगे, उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। राहुल ने दावा किया कि विपक्ष ने वोट चोरी के मामले में भाजपा के साथ कथित मिलीभगत के सबूत सामने रखे हैं।
राहुल गांधी ने आशंका जताई कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की पात्रता मतदाता सूची से जोड़ दी गई तो राशन, पेंशन, मनरेगा, आवास, छात्रवृत्ति और आरक्षण जैसी सुविधाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मतदान करना नागरिक का अधिकार है, न कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की शर्त। किसी गरीब की पेंशन को उसके वोटर कार्ड से जोड़कर नहीं रखा जाना चाहिए। अपनी पोस्ट के अंत में राहुल गांधी ने इसे सिर्फ वोट चोरी नहीं, बल्कि लोगों के अधिकारों की चोरी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी।
राहुल गांधी जी को तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने में महारत हासिल है। सरकार ने यह तय किया है कि वास्तविक लाभार्थी तक सरकार का लाभ पहुंचे और कोई बिचौलिया उसका लाभ न ले सके। प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM VGSY) का उद्देश्य प्रत्येक पात्र पंचायत प्रतिनिधि एवं पंचायत से जुड़े व्यक्ति तक आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन पहुँचाना है। इसके अंतर्गत EPIC नंबर तथा बायोमेट्रिक-आधारित आधार सत्यापन के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
ललन सिंह ने राहुल गांधी को दिया जवाब
राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ललन सिंह ने एक्स पर लिखा, “राहुल गांधी जी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कला में माहिर हो गए हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे और कोई बिचौलिया इसका फायदा न उठा सके।
ललन सिंह ने अपनी सफाई में प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वशासन योजना (PM VGSY) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र पंचायत प्रतिनिधि और पंचायत से जुड़े लोगों को जरूरी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इसके तहत प्रशिक्षण लेने वालों की पहचान EPIC नंबर और आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री की इस सफाई के मुताबिक, EPIC नंबर और आधार का बायोमेट्रिक सत्यापन PM VGSY के प्रशिक्षणार्थियों की पहचान के लिए किया जाएगा। हालांकि, कार्यक्रम में दिए गए उनके शुरुआती बयान में लाभार्थियों के भुगतान के संदर्भ में आधार कार्ड की जगह EPIC नंबर और बायोमेट्रिक का इस्तेमाल करने की बात कही गई थी। यही अंतर इस पूरे विवाद की वजह बना।
100 रुपये का उदाहरण देकर समझाया सरकार का मकसद
राहुल गांधी को जवाब देते हुए ललन सिंह ने सरकार की मंशा समझाने के लिए 100 रुपये का उदाहरण भी दिया। उनके बयान के उपलब्ध अंश के मुताबिक, उन्होंने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं में यदि किसी लाभार्थी के लिए 100 रुपये जारी किए जाते थे तो बिचौलियों की वजह से उसे पूरा पैसा नहीं मिल पाता था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 100 रुपये में से लाभार्थी तक केवल 10 रुपये पहुंचते थे और बाकी 90 रुपये बीच में ही हड़प लिए जाते थे।
ललन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की ओर से लाभार्थी के लिए जारी किए गए 100 रुपये के पूरे 100 रुपये उसी तक पहुंचें। इसके लिए पहचान और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके और वास्तविक पात्र व्यक्ति को उसका पूरा हक मिले।
एसआईआर के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ भी मतदाता सूची में नाम होने से जोड़ दिया गया तो जिन लोगों के नाम सूची से हटेंगे, उनके सामने नई मुश्किल खड़ी हो सकती है।
हालांकि, ललन सिंह की सोशल मीडिया पर दी गई सफाई में PM VGSY के तहत प्रशिक्षण लेने वालों की पहचान के लिए EPIC नंबर और आधार के बायोमेट्रिक सत्यापन की बात कही गई है। इस सफाई में यह नहीं कहा गया है कि राशन, पेंशन, मनरेगा, आवास या दूसरी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब वोटर आईडी अनिवार्य होगा। ऐसे में राहुल गांधी की आशंकाएं और ललन सिंह की सफाई दोनों को उनके-अपने संदर्भ में समझना जरूरी है।फिलहाल, इस विवाद ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान, आधार कार्ड की भूमिका और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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