धान कटाई का सीजन अपने आखिरी चरण में पहुंचने वाला है। दूसरी तरफ किसान गेहूं की बुवाई से जुड़ी तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में IARI ने पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पराली को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और उसमें जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। किसान इसका उपयोग मल्चिंग के रूप में भी कर सकते हैं।
मिट्टी में नमी बनाए रखेगी पराली
देश के कई हिस्सों में कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, आगामी दिनों में अल नीनो बारिश को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में पराली से मल्चिंग करना काफी अहम हो जाता है, क्योंकि इस तरह मिट्टी की नमी भाप बनकर कम उड़ती है और लंबे समय तक मिट्टी में नमी मौजूद रहती है। धान की पराली को जल्दी और प्रभावी तरीके से सड़ाने के लिए किसान 'पूसा डीकंपोजर' कैप्सूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए 4 कैप्सूल प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सिफारिश की गई है।
गेहूं किसान दीमक से सतर्क
अगर आपके खेत में दीमक की समस्या है, तो किसान पलेवा संग क्लोरपाईरिफाँस 20 ईसी का 5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर सकते हैं।
मिर्च-टमाटर और गुलाब बागवानों को सलाह
वहीं, मिर्चा और टमाटर किसानों को रोग से प्रभावित पौधा दिखे तो उसे तुरंत उखाड़कर जमीन में गहरा गाड़ दें। इस तरह खेत के दूसरे पौधों तक बीमारी फैलने से बच सकती है। इसके अलावा, गुलाब की बागवानी करने वाले किसान इस समय पौधों की कटाई-छंटाई करने की सलाह दी गई है। कटाई के तुरंत बाद कटी हुई डालियों पर बाविस्टीन का लेप लगाना चाहिए, ताकि पौधों पर किसी भी तरह के कवक (फफूंद) का हमला न हो सके।