हिमाचल प्रदेश में स्टांप शुल्क बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। हिमाचल किसान सभा ने शुक्रवार को इस बढ़ोतरी के खिलाफ मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन सोलन के उपायुक्त के माध्यम से भेजा गया। सभा ने सरकार से बढ़ी हुई दरों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
किसान सभा का कहना है कि स्टांप शुल्क में भारी बढ़ोतरी से आम परिवारों, किसानों और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त, संपत्ति हस्तांतरण और रजिस्ट्री कराने में पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा शपथपत्र, समझौता, मुख्तारनामा, बंधक विलेख और लीज जैसे कानूनी दस्तावेज बनवाना भी महंगा हो जाएगा।
करीब 40 तरह के लेन-देन पर बढ़ा शुल्क
किसान सभा के अनुसार, नए विधेयक में करीब 40 श्रेणियों के लेन-देन पर स्टांप शुल्क की दरों में बदलाव किया गया है। इसका असर जमीन-जायदाद से जुड़े कई तरह के कानूनी कामों पर पड़ेगा। सभा ने कहा कि इस फैसले से छोटे किसानों, सीमित जमीन वाले परिवारों और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी
किसान सभा ने सरकार से बढ़ी हुई दरें वापस लेने और आम लोगों को राहत देने की मांग की है। सभा का कहना है कि सरकार को किसानों, छोटे भूस्वामियों और निम्न-मध्यम वर्ग के हितों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, जमीन और संपत्ति से जुड़े जरूरी कामों को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखना चाहिए। सभा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो प्रदेशभर में व्यापक जन-आंदोलन किया जाएगा।
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