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सुअर पालकों की बदलेगी किस्मत: वैज्ञानिक तरीके से सुधरेगी नस्ल, जारी हुई कृत्रिम गर्भाधान की नई गाइडलाइन

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 06 Nov 2026 06:50 PM IST
सार

सुअर पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कृत्रिम गर्भाधान की नई गाइडलाइन जारी की है। इससे पूर्वोत्तर में सुअरों की नस्ल और उत्पादकता सुधारने में मदद मिलेगी।

सरकार ने जारी की कृत्रिम गर्भाधान की नई गाइडलाइन
सरकार ने जारी की कृत्रिम गर्भाधान की नई गाइडलाइन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने देश में सुअर पालन को बढ़ावा देने और किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए नई पहल की है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को सिक्किम दौरे के दौरान सुअरों में कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) को लेकर एक नई पुस्तिका जारी की। इसमें बेहतर नस्ल के सुअर तैयार करने के लिए वीर्य उत्पादन, संग्रह, जांच, भंडारण और इस्तेमाल से जुड़े मानक तय किए गए हैं।

इस पहल का खास फायदा पूर्वोत्तर भारत के सुअर पालकों को मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य वैज्ञानिक तरीके से सुअरों की नस्ल सुधारना, उनकी प्रजनन क्षमता बढ़ाना और मांस उत्पादन में इजाफा करना है। इससे छोटे सुअर पालकों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

पूर्वोत्तर में होता है देश का 45% सुअर पालन
20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार, भारत में करीब 90.6 लाख सुअर हैं। यह देश के कुल पशुधन का लगभग 1.7 प्रतिशत है। पूर्वोत्तर भारत सुअर पालन का प्रमुख केंद्र है। यहां देश के कुल सुअरों की आबादी का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा है।

देश में लगभग 79 प्रतिशत सुअर देसी और गैर-वर्णित नस्लों के हैं। ऐसे में वैज्ञानिक प्रजनन के जरिए इनकी नस्ल और उत्पादकता सुधारने की काफी गुंजाइश है। बेहतर नस्ल के सुअर मिलने से मांस उत्पादन बढ़ सकता है और किसानों को कारोबार में फायदा हो सकता है।

वीर्य संग्रह से कृत्रिम गर्भाधान तक तय होंगे मानक
सरकार की ओर से जारी पुस्तिका में सुअरों के कृत्रिम गर्भाधान की पूरी प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें शामिल हैं-
  • बेहतर नस्ल के प्रजनन योग्य सुअरों का चयन।
  • सुअरों से वीर्य निकालने और उसकी गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया।
  • वीर्य का प्रसंस्करण और सुरक्षित भंडारण।
  • वीर्य को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के नियम।
  • प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता बनाए रखने के तरीके।
  • बीमारियों से बचाव और जैव सुरक्षा के उपाय।
  • किसानों तक कृत्रिम गर्भाधान की सुविधाएं पहुंचाना।

किसानों को क्या होगा फायदा?
इस प्रोटोकॉल से पशु चिकित्सकों, प्रजनन केंद्रों और किसानों को सुअरों के वैज्ञानिक प्रजनन में मदद मिलेगी। कृत्रिम गर्भाधान के जरिए बेहतर नस्ल के प्रजनन को बढ़ावा दिया जा सकेगा। इससे सुअरों की प्रजनन क्षमता और उत्पादकता में सुधार की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि इस पहल से पूर्वोत्तर में देसी सुअर नस्लों के संरक्षण और सुधार को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बेहतर प्रजनन सामग्री मिलने से सुअर पालन का कारोबार अधिक लाभदायक बन सकता है। इसका असर मांस उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ने की उम्मीद है।
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