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सब्जी किसानों को मिलेगा जीनोम एडिटिंग तकनीक का लाभ : IIVR में खुलेगी खास प्रयोगशाला, नई ब्रीडिंग सुविधा शुरू

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 18 Oct 2026 11:50 AM IST
सार

  • सब्जी किसानों तक बेहतर उपज देने वाली किस्में पहुंचाने के लिए IIVR ने एक कदम आगे बढ़ाया।
  • जीनोम एडिटिंग लैब के लिए हुआ भूमि पूजन।
  • BSL-3 लैब और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा का उद्घाटन।
  • ये कदम बेहतर किस्मों के तेजी से विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सब्जी किसानों को मिलेगा बेहतर किस्मों का साथ, IIVR ने जीनोम एडिटिंग तकनीक की ओर एक और कदम बढ़ाया।
सब्जी किसानों को मिलेगा बेहतर किस्मों का साथ, IIVR ने जीनोम एडिटिंग तकनीक की ओर एक और कदम बढ़ाया। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सब्जी किसानों तक बेहतर किस्में पहुंचाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट 17 अक्तूबर को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी के दौर पर रहे। इस दौरान संस्थान में जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला के लिए भूमि पूजन किया गया। बता दें कि जीनोम एडिटिंग तकनीक सब्जी की ऐसी किस्म तैयार करने का वादा करती है, जो मौजूदा किस्मों से बेहतर उपज और बीमारियों से लड़ने में ेसक्षम हैं। ऐसे में IIVR में बनने वाली यह प्रयोगशाला किसानों के लिए काफी मायने रखती है।

प्रयोगशाला के अलावा IIVR में बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा का उद्घाटन भी किया गया। इन आधुनिक सुविधाओं की मदद से अधिक उत्पादकता, बेहतर पोषण और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल सब्जी की किस्मों को विकसित करना है।

जीनोम एडिटिंग से स्पीड ब्रीडिंग सुविधा तक, नई किस्मों के विकास को तेजी
जीनोम एडिटिंग तकनीक में मौजूदा किस्मों के गुणों में बदलाव कर बेहतर किस्मों का विकास किया जाता है। वहीं, स्पीड ब्रीडिंग सुविधा नई किस्मों के विकास में लगने वाले कमय को कम करती है। दूसरी तरफ BSL-3 प्रयोगशाला वैज्ञानिकों को एक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में शोध करने में मदद करेगी।

किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद
संस्थान के दौरे के दौरान महानिदेशक और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों ने खेतों का दौरा किया और नई किस्मों व हाइब्रिड तकनीकों को देखा। इस अवसर पर किसानों और किसान उत्पादक संगठनों के साथ एक संवाद कार्यक्रम भी रखा गया। इसमें सब्जियों के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने समेत आधुनिक तकनीकें सीधे खेतों तक पहुंचाने पर चर्चा की गई।

धिकारियों का मानना है कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इन तकनीकों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब ये किसानों तक पहुँचेंगी और वे इन्हें अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपनाएंगे।


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