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Rajasthan: चित्तौड़गढ़ में बनेगी प्रदेश की पहली सीताफल प्रोसेसिंग यूनिट, किसानों को मिलेगा बेहतर भाव, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 18 Oct 2026 11:02 AM IST
सार

  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में बनेगी प्रदेश की पहली सीताफल प्रोसेसिंग यूनिट
  • परियोजना पर खर्च होंगे 2.30 करोड़ रुपये
  • किसानों से सीताफल खरीदकर निकाला जाएगा गूदा
  • माइनस 40 डिग्री तापमान पर सुरक्षित रखा जाएगा पल्प
  • मार्च 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

राजस्थान के सीताफल किसनों को मिलेगा प्रसंस्करण सुविधा का साथ।
राजस्थान के सीताफल किसनों को मिलेगा प्रसंस्करण सुविधा का साथ। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान के किसानों के लिए बड़ी खबर है। मेवाड़ क्षेत्र के किसानों को बेहतर भाव और बाजार तक पहुंच दिलाने के लिए चित्तौड़गढ़ में प्रदेश की पहला सीताफल प्रसंस्करण सुविधा स्थापित होने जा रही है। यह यूनिट सीताफल के लिए एक बाजार साबित होगी।

2.30 करोड़ रुपये की आएगी लागत
इस परियोजना पर कुल 2.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के भीलवाड़ा खंड को निर्माण कार्य समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह पूरी यूनिट पांच हजार वर्ग मीटर के परिसर में बनेगी।

योजना के तहत 1.25 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर, 75 लाख रुपये अत्याधुनिक मशीनरी की खरीद पर और 30 लाख रुपये किसानों के प्रशिक्षण व पौध संरक्षण के लिए बनने वाले 1008 वर्ग मीटर के शेडनेट हाउस पर खर्च किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस यूनिट का निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

चार चरणों में होगा प्रसंस्करण का काम
उत्कृष्टता केंद्र में बनने वाली इस यूनिट में सीताफल का प्रसंस्करण वैज्ञानिक तरीके से होगा। इसके लिए मुख्य हॉल को चार भागों में बांटा गया है। पहला भाग किसानों से खरीदे गए सीताफल का भंडारण। दूसरा भाग फलों की सफाई, धुलाई और सुखाने की प्रक्रिया। तीसरा भाग मशीनों के जरिए सीताफल से पल्प (गूदा) निकालने का काम। चौथा भाग: तैयार पल्प की पैकिंग।

माइनस 40 डिग्री पर रहेगा पल्प सुरक्षित
तैयार किए गए पल्प को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक प्रशीतन (रेफ्रिजरेशन) व्यवस्था की जा रही है। पल्प को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाएगा, जिससे सीजन खत्म होने के बाद भी इसकी ताजगी और स्वाद बना रहेगा। इससे बाजार में पल्प की मांग और आपूर्ति निरंतर बनी रहेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों और व्यापारियों को मिलेगा।

सरकार का मानना है कि इस पहल से सीताफल की खेती को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण सुविधा मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसके साथ ही, किसान सीताफल की खेती के विस्तार के लिए भी प्रेरित होंगे।


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