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UP Sugarcane Price: गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग, BJP की सहयोगी RLD ने सीएम योगी को लिखा पत्र

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 24 Oct 2026 03:35 PM IST
सार

UP Sugarcane Price 2026-27: RLD ने सीएम योगी को पत्र लिखकर गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य बढ़ाने की मांग की। जानें किसानों ने खाद, डीजल और खेती की बढ़ती लागत को लेकर क्या कहा।

गन्ने की खेती
गन्ने की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में नए पेराई सत्र से पहले गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। भाजपा की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) बढ़ाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों की कमाई में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, RLD के नौ विधायकों और दो सांसदों ने यह मांग उठाई है। पार्टी के विधायक दल के नेता राजपाल सिंह बालियान के नेतृत्व में लिखे गए पत्र में कहा गया है कि नए पेराई सत्र की शुरुआत से पहले गन्ने का उचित दाम तय किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को बढ़ती लागत की भरपाई मिल सके।

पिछले साल बढ़े थे 30 रुपये प्रति क्विंटल
राजपाल सिंह बालियान ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले पेराई सत्र में गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। उन्होंने इसे किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि, उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ने के कारण 2026-27 के पेराई सत्र के लिए फिर से मूल्य बढ़ाने की जरूरत है।

RLD के पत्र में खाद, बीज, कीटनाशक और दूसरे कृषि इनपुट के बढ़ते खर्च का जिक्र किया गया है। इसके अलावा डीजल, सिंचाई, कृषि मशीनों और फसल की देखभाल से लेकर कटाई तक की मजदूरी का खर्च भी बढ़ने की बात कही गई है।

गन्ने की खेती में लंबे समय तक लगा रहता है पैसा
गन्ने की खेती में किसान को लंबे समय तक निवेश करना पड़ता है। फसल तैयार होने और मिल को गन्ना आपूर्ति करने के बाद ही उसकी कमाई होती है। RLD नेताओं के मुताबिक, खेती की लागत बढ़ने से किसानों की आय पर दबाव पड़ रहा है। इससे उनके लिए अगली फसल की तैयारी और घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है।

पार्टी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य तय करते समय किसानों की बढ़ती लागत और उनकी आमदनी के बीच के अंतर को ध्यान में रखा जाए। किसानों को ऐसा दाम मिलना चाहिए, जिससे उनकी लागत की भरपाई हो सके और खेती जारी रखना आर्थिक रूप से व्यवहार्य रहे।

चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति भी होगी अहम
गन्ने का दाम बढ़ने का असर चीनी मिलों की लागत पर भी पड़ता है, क्योंकि गन्ना उनके लिए मुख्य कच्चा माल है। ऐसे में सरकार के सामने किसानों को उचित मूल्य देने के साथ मिलों की आर्थिक स्थिति बनाए रखने और गन्ना भुगतान समय पर सुनिश्चित करने की चुनौती भी रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सामने किसानों का बकाया समय पर चुकाने और चीनी उद्योग पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव न पड़ने देने का सवाल भी है।

नए पेराई सत्र से पहले बढ़ी मांग
RLD की यह मांग ऐसे समय आई है, जब नया गन्ना पेराई सत्र शुरू होने वाला है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में गन्ना किसानों के लिए इसका खास महत्व है। राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में गन्ने के दाम का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब किसानों, चीनी मिलों और राजनीतिक दलों की नजर राज्य सरकार के फैसले पर रहेगी। हालांकि, 2026-27 के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
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