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Entire Barmer Panchayat Elected Unopposed With 78 Year Old Bhikhi Devi Becoming Sarpanch For Seventh Time
न मुकाबला, न मतदान : बाड़मेर की पूरी पंचायत चुनी गई निर्विरोध, 78 साल की भीखी देवी सातवीं बार बनीं सरपंच
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 24 Oct 2026 05:20 PM IST
सार
राजस्थान के बाड़मेर में 78 वर्षीय भीखी देवी लगातार सातवीं बार निर्विरोध सरपंच चुनी गईं। वीरेंद्र नगर पंचायत में सातों वार्ड पंच भी बिना मतदान के निर्वाचित हुए।
78 वर्षीय भीखी देवी लगातार सातवीं बार निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुई हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
Rajasthan Panchayat Elections 2026: राजस्थान के पंचायत चुनाव में जहां प्रत्याशी जीत के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं, वहीं बाड़मेर जिले की एक ग्राम पंचायत में लोगों ने मिलकर अपना सरपंच चुन लिया। बायतु पंचायत समिति क्षेत्र की वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत में 78 वर्षीय भीखी देवी लगातार सातवीं बार निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुई हैं। इस बार भी उनके सामने कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं आया। खास बात यह है कि गांव के सभी सात वार्डों के पंच भी निर्विरोध चुने गए हैं। ऐसे में पूरी ग्राम पंचायत का गठन बिना मतदान के हो गया।
चार दशक से गांव की कमान भीखी देवी के हाथों में
भीखी देवी पहली बार वर्ष 1994-95 में सरपंच चुनी गई थीं। इसके बाद से लगातार वह इस पद पर निर्विरोध चुनी जाती रही हैं। इस बार भी नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी अन्य प्रत्याशी ने उनके खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत की यह खास बात है कि यहां सरपंच के साथ-साथ सभी सात वार्डों के पंच भी सर्वसम्मति से चुने गए। इस वजह से गांव में मतदान कराने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
पूर्व मंत्री की पत्नी, गांव में सादगी और काम से पहचान
भीखी देवी राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं। हेमाराम चौधरी छह बार विधायक रह चुके हैं। वह राजस्थान सरकार में मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, भीखी देवी सादगीपूर्ण जीवन जीती हैं। सरपंच के रूप में अपने पिछले कार्यकालों में उन्होंने गांव के विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं को हल करने पर काम किया। ग्रामीणों का भरोसा उनकी लगातार निर्विरोध जीत की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
दिवंगत बेटे के नाम पर रखा गया पंचायत का नाम
वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत का नाम पहले बायतु भीम था। बाद में पंचायत के पुनर्गठन के बाद इसका नाम बदलकर वीरेंद्र नगर रखा गया। यह नाम हेमाराम चौधरी और भीखी देवी के इकलौते बेटे डॉ. वीरेंद्र चौधरी के नाम पर रखा गया है। डॉ. वीरेंद्र पेशे से चिकित्सक थे। कम उम्र में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया था। पंचायत का नाम बदलने के बाद भी ग्रामीणों ने गांव की जिम्मेदारी एक बार फिर भीखी देवी को सौंप दी।
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