गन्ना किसानों को दिवाली से यूपी सरकार बड़ा तोहफा दे सकती है। खबरों के अनुसार, प्रदेश सरकार गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। मिलों को गन्ना सप्लाई करने वाले 47 लाख किसानों से यह विचार सीधे जुड़ा हुआ है।
एक तरफ किसान संगठन गन्ने के भाव को 400 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं, वहीं, चीनी उद्योग किसी भी बढ़ोतरी के लिए तैयार नहीं दिखता। इस पर मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित राज्य परामर्शित मूल्य सिफारिश समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं।
लागत बढ़ने से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
किसान नेताओं का कहना है कि गन्ने की प्रति क्विंटल उत्पादन लागत 400 रुपये को पार कर चुकी है। ऐसे में लागत को बोझ कम करने के लिए सरकार को कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करनी चाहिए।
मिल मालिकों ने वित्तीय दबाव का दिया हवाला
मिल मालिकों का कहना है कि गन्ने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और कारखाने को चलाने में बढ़ते खर्च ने उद्योग की वित्तीय सेहत पर खराब असर डाला है। उद्योग का कहना है कि बीते सालों में गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसी हिसाब से चीनी का बिक्री मूल्य उसी अनुपात में नहीं बढ़ा।
अंतिम बैठक के बाद कैबिनेट को भेजा जाएगा प्रस्ताव
चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि सभी पक्षों की राय जानने के लिए अंतिम परामर्श बैठक जल्द ही, संभवतः दीपावली से पहले की जाएगी। मथुरा से फोन पर बातचीत में मंत्री ने संकेत दिया कि किसानों की मांगों के समाधान के लिए एसएपी में बढ़ोतरी संभव है। विभागीय मंत्री के साथ अंतिम बैठक के बाद यदि सरकार दाम बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
पिछले सीजन में ₹30 प्रति क्विंटल की हुई थी बढ़ोतरी
बीते 2025-26 के पेराई सीजन में सरकार ने अगेती किस्म के गन्ने के मूल्य में 30 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 400 रुपये प्रति क्विंटल किया था। इसके अलावा, सामान्य किस्म के गन्ने का भाव 30 रुपये बढ़ाकर 390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था, जबकि अनुपयुक्त किस्म का भाव बिना किसी बदलाव के 355 प्रति क्विंटल पर ही रखा गया था।