नए गन्ना पेराई सीजन के पहले महीने यानी अक्टूबर में रिकॉर्ड 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। उत्पादन में आई इस बड़ी तेजी में सबसे मुख्य भूमिका महाराष्ट्र की रही, जहां की मिलों ने अकेले 7.20 लाख टन चीनी तैयार की है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर 2025 में देश भर में केवल 1 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हो पाया था।
बाजार में चीनी की भरपूर उपलब्धता की उम्मीद
आंकड़ों से पता चलता है कि 1 अक्टूबर को देश में करीब 36 लाख टन चीनी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था। इसके अलावा सरकार ने अक्टूबर के दौरान मिलों को खुले बाजार में बेचने के लिए 27 लाख टन का कोटा तय किया था। अक्टूबर महीने में हुए इस रिकॉर्ड उत्पादन के बाद अब नवंबर में चीनी की आपूर्ति और उपलब्धता काफी बेहतर होने की संभावना है। वहीं, देश भर की बाकी बची सभी चीनी मिलों में भी अगले 7 से 10 दिनों के भीतर पेराई का काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।
पेराई में भारी तेजी, लेकिन रिकवरी दर में मामूली गिरावट
फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर में 152 चीनी मिलों ने पेराई का काम शुरू कर दिया है, जबकि अक्टूबर 2025 में सिर्फ 31 मिलें ही चालू हो सकी थीं। इस दौरान गन्ने की पेराई बढ़कर 105.43 लाख टन पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी महीने में महज 11.84 लाख टन थी। हालांकि, गन्ने से चीनी बनने की औसत दर (रिकवरी रेट) में हल्की गिरावट आई है। अक्टूबर में देश भर की औसत चीनी रिकवरी 8.04 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में 8.36 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
महाराष्ट्र में बंपर शुरुआत, उत्तर प्रदेश का क्या?
राज्यों के आंकड़ों के मुताबिक, देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले महीने 3 मिलों में पेराई शुरू होने के बावजूद चीनी का कोई उत्पादन दर्ज नहीं हुआ। पिछले साल अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश की 10 मिलों ने 10,000 टन चीनी बनाई थी। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में 123 मिलों ने काम शुरू किया, जबकि पिछले साल इसी महीने में वहां केवल 2 मिलें चली थीं और कोई चीनी नहीं बनी थी। महाराष्ट्र में रिकवरी दर में भी सुधार आया है; शुरुआत में जब 20-30 मिलें चालू हुई थीं तब यह 6 प्रतिशत से भी कम थी, लेकिन पूरे अक्टूबर महीने का औसत 7.90 प्रतिशत दर्ज किया गया।
कर्नाटक में उत्पादन की रफ्तार और किसानों का आंदोलन
कर्नाटक के आंकड़ों को देखें तो अक्टूबर 2026 में केवल 7 मिलों ने 8.33 लाख टन गन्ने की पेराई की और 9.6 प्रतिशत की रिकवरी के साथ 80,000 टन चीनी बनाई। पिछले साल इसी समय वहां 17 मिलों ने 7.07 लाख टन गन्ना पेरकर 9.9 प्रतिशत रिकवरी के साथ 70,000 टन चीनी बनाई थी। कर्नाटक में किसान गन्ने के ऊंचे दाम की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे, जो हाल ही में राज्य सरकार के दखल और मध्यस्थता के बाद समाप्त हुआ है।
गन्ने का उचित मूल्य (FRP) और रिकवरी का गणित
सरकारी नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार हर सीजन के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करती है, जबकि कुछ राज्य अपनी ओर से राज्य-सलाहकारी मूल्य (SAP) भी घोषित करते हैं। चीनी मिलों को सरकार द्वारा तय इन भावों पर ही किसानों से गन्ना खरीदना अनिवार्य होता है। केंद्र सरकार का एफआरपी 10.25 प्रतिशत की बुनियादी रिकवरी दर पर तय किया जाता है। अगर किसी क्षेत्र में रिकवरी दर इस मानक से कम रहती है, तो किसानों को मिलने वाला दाम भी घट जाता है, जिससे उनकी कमाई प्रभावित होती है। सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए बिक्री कोटा जारी
इस बीच, खाद्य मंत्रालय ने मिल-वार कोटा जारी करते हुए चीनी मिलों को नवंबर के पहले 15 दिनों में 13 लाख टन चीनी बेचने का निर्देश दिया है। 31 अक्टूबर की समयसीमा बीत जाने के बाद, एडवांस लाइसेंस स्कीम के तहत आने वाले दो आयातकों को कोई कोटा नहीं दिया गया है। मंत्रालय के आवंटन के अनुसार, महाराष्ट्र की चीनी मिलों को 4.78 लाख टन, उत्तर प्रदेश की मिलों को 4.17 लाख टन और कर्नाटक की मिलों को 2.63 लाख टन चीनी बेचने की मंजूरी दी गई है।