अनाज से इथेनॉल बनाने वाली कंपनीयों ने सरकार ने सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए इथेनॉल की खरीद कीमतों और कोटा आवंटन के नियमों की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि गन्ना आधारित इथेनॉल पर लागू नई पाबंदियों से ईंधन की सप्लाई पर असर पड़ने के साथ मक्का आधारित इथेनॉल कारखानों से संचालन और किसान आय पर विपरीत असर पड़ सकता है। बता दें कि सरकार ने नए सप्लाई वर्ष में इथेनॉल खरीद के टेंडर में गन्ने के रस, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे (मोलासेस) से बने इथेनॉल को शामिल नहीं किया है।
मक्के से बनने वाले इथेनॉल के दाम घटे, बाजार में कच्चा माल हुआ महंगा
एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.के. जैन के अनुसार, सरकार ने मक्के से बनने वाले इथेनॉल की खरीद दर 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी है। उन्होंने साफ किया कि इससे मक्का आधारित कारखानों की वित्तीय स्थिति पर चोट पहुंचेगी और किसानों को मिलने वाली आमदनी भी प्रभावित होगी। वहीं उद्योग के जानकारों का कहना है कि खुले बाजार में मक्के की कीमत पिछले साल के 18 रुपये प्रति किलो से बढ़कर अब लगभग 27 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जिसके कारण कारखानों के लिए उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।
सस्ते चावल के कारण मक्के की हिस्सेदारी घटने की आशंका
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने चिंता जताई कि नए टेंडर में चावल आधारित इथेनॉल पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इसमें भारतीय खाद्य निगम के अतिरिक्त चावल से बने इथेनॉल का दाम 60.32 रुपये प्रति लीटर और खराब अनाज से बने इथेनॉल का दाम 64 रुपये प्रति लीटर रखा गया है। एसोसिएशन को डर है कि तेल कंपनियों की सबसे कम कीमत पर आधारित आवंटन व्यवस्था के चलते सस्ते चावल के मुकाबले मक्के को खरीद में उचित हिस्सा नहीं मिल पाएगा। अगर 64 रुपये प्रति लीटर वाले टूटे चावल से प्रतिस्पर्धा बढ़ी, तो मक्का डिस्टिलरीज को अपने दाम घटाने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले मक्के के भाव पर पड़ेगा।
टूटे चावल से रिकॉर्ड उत्पादन के आसार पर सवाल, क्या इतनी सप्लाई मिलेगी?
उद्योग के आकलनों के अनुसार, टूटे चावल और खराब अनाज से बनने वाले इथेनॉल का उत्पादन पिछले साल के करीब 80 करोड़ लीटर से बढ़कर इस चालू सप्लाई सीजन में 700 करोड़ लीटर से भी अधिक पहुंचने का अनुमान है। लेकिन, कुछ जानकार इतने उछाल के लिए टूटे चावल की लगातार सप्लाई को काफी मुश्किल बता रहे हैं। उनका तर्क है कि बीते सालों में कभी भी इथेनॉल बनाने के लिए टूटे चावल का योगदान 100 करोड़ लीटर से ज्यादा नहीं रहा है।
इथेनॉल ने मक्का किसानों को दिया तय बाजार
सरकार मानती है कि इथेनॉल उत्पादन में मक्का के उपयोग ने किसानों को एक तय बाजार और बेहतर भाव देने में मदद की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सप्लाई वर्ष 2024-25 के दौरान इथेनॉल उत्पादन के लिए 131.1 लाख टन मक्के का उपयोग किया गया था, जबकि इसकी तुलना में एफसीआई द्वारा दिए गए अतिरिक्त चावल और टूटे चावल की कुल खपत लगभग 50 लाख टन ही रही थी।
पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का टेंडर और नई शर्तें
पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने तेल कंपनियों की तरफ से 2026-27 के लिए 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर में केवल मक्का, टूटा चावल, एफसीआई का अतिरिक्त चावल और कम चीनी वाले सी-हैवी शीरे से तैयार इथेनॉल की ही बोली स्वीकार की जाएगी।
अनाज आधारित इथेनॉल का बढ़ता दबदबा और एफसीआई के नियम
जानकारों का कहना है कि, पिछले सप्लाई सीजन 2025-26 में कुल जरूरत का केवल 26 प्रतिशत इथेनॉल ही गन्ना आधारित स्रोतों से आया था, जबकि 74 प्रतिशत यानी 761 करोड़ लीटर इथेनॉल अनाजों से तैयार किया गया था। इसमें मक्के की हिस्सेदारी 518 करोड़ लीटर (47%) और चावल की हिस्सेदारी 305 करोड़ लीटर (27%) रही थी।