पंजाब में पराली जलाने के मामलों में अचानक तेजी देखने को मिली है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार, प्रदेश में बीते 72 घंटों के अंदर ही 500 से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि 30 अक्तूबर तक राज्य में पराली जलाने के 1,047 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2 नवंबर तक बढ़कर 1,612 पहुंच गए। प्रदेश में अब तक धान के 77.38 प्रतिशत रकबे में कटाई का काम पूरा हो चुका है।
जिलों पर नजर डालें तो तरनतारन 489 मामलों के साथ पराली जलाने का हॉटस्पॉट बना हुआ है, जिसके बाद फिरोजपुर (193 मामले) और अमृतसर (192 मामले) का नाम है।
गेहूं की बुवाई की समयसीमा के चलते बढ़ी जल्दबाजी
अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की बुवाई का समय पास आया है, जिस वजह से मामलों में तेजी आई है। 15 नवंबर तक गेहूं की बुवाई का समय सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसे में किसान अब जल्दी खेत खाली करने पर जोर दे रहे हैं।
पराली जलाने के मामलों में गिरावट
इस बार के धान कटाई सीजन में पराली जलाने के मामले पिछले साल से कम है। आंकड़ों के अनुसार, इसी समय तक 2,262 मामले दर्ज किए गए थे। बीते सीजन में इस समय तक 85 प्रतिशत कटाई हो चुकी थी, जबकि इस साल अभी केवल 77 प्रतिशत कटाई ही पूरी हुई है।
माझा के बाद अब मालवा क्षेत्र में बढ़ा प्रकोप
आंकड़ों से पता चलता है कि पराली जलाने का दायरा अब माझा से निकलकर मालवा क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। सीजन की शुरुआत में माझा इलाके के अमृतसर और तरनतारन में सबसे ज्यादा आग की घटनाएं देखी गई थीं, लेकिन अब मध्य और दक्षिणी पंजाब में कटाई तेज होने के साथ वहां के जिलों में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मालवा के संगरूर में 76, बठिंडा में 68, पटियाला में 54, फरीदकोट में 49, फाजिल्का में 34, बरनाला में 34, मोगा में 23 और मुक्तसर में 20 मामले सामने आ चुके हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अलर्ट और सख्त निगरानी
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्डके अनुसार, मालवा में कटाई के जोर पकड़ने के साथ ही सभी जिला प्रशासनों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।