योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों और आम लोगों को होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की दरों में बढ़ोतरी की है
अब फसल नुकसान पर किसानों को 30 प्रतिशत तक ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा
बड़े पशुओं की मौत पर सहायता राशि 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की गई।
सीएम योगी ने प्रदेश के 3 करोड़ किसान परिवारों के लिए जल्द आर्थिक पैकेज का एलान भी किया है।
दिवाली से पहले किसानों को बड़ी राहत देते हुए योगी सरकार ने प्राकृतिक फसल और पशु नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे को बढ़ा दिया है। सीएम योगी के अनुसार, अब किसानों को फसल नुकसान पर 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा। इस कदम से प्रदेश के करीब 10 लाख किसानों को फायदा होने की उम्मीद है।
खेती किसानी के अलावा सरकार ने कई दूसरे आपदा नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जैसे प्राकृतिक आपदा की वजह से जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को चार की जगह आठ लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. जानकारी के अनुसार, यह मुआवजा एक अप्रैल से चार नवंबर के बीच हुए नुकसान की भरपाई के लिए दिया जाएगा।
3 करोड़ किसान परिवारों के लिए जल्द आएगा खास आर्थिक पैकेज
बीते दिनों प्रदेश में खराब मौसम की वजह से किसानों को फसल नुकसान उठाना पड़ा है। हाल ही मं सीएम योगी ने फसल नुकसान पर कहा था कि नुकसान की भरपाई के अलावा जल्द प्रदेश के तीन करोड़ किसान परिवारों के लिए अलग आर्थिक पैकेज लाया जाएगा।
पशुओं के नुकसान पर अब मिलेगी ज्यादा मदद
राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत दी जाने वाली सहायता राशि भी बढ़ा दी गई है। नए नियमों के अनुसार, आपदा में बड़े जानवरों की मौत होने पर अब पशुपालकों को 40,000 रुपये की जगह 50,000 रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं, बकरी, भेड़ और सुअर जैसे छोटे जानवरों के लिए यह राशि 4,000 से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है। घोड़ा और खच्चर जैसे बोझा ढोने वाले जानवरों की मौत पर अब 20,000 की जगह 25,400 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, सरकार के अनुसार मुर्गी पालकों को भी अब प्रति मुर्गी 100 रुपये की जगह 130 रुपये का मुआवजा मिलेगा।
खेतों और रेशम उत्पादन के लिए नए मुआवजे की दरें
फसल नुकसान की बात करें तो सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में मुआवजा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। बारिश पर निर्भर इलाकों में यह राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। वहीं, बहुवर्षीय फसलों और कृषि-वानिकी के लिए मुआवजा 22,500 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर हो गया है। सरकार के अनुसार, रेशम उत्पादन में हुए नुकसान पर भी अब ज्यादा मदद मिलेगी। एरी, शहतूत और टसर रेशम के लिए सहायता 6,000 से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि मूंगा रेशम के लिए इसे 7,500 से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर किया गया है।
जमीन सुधार, राहत कैंप और मकानों के लिए नई व्यवस्था
कृषि भूमि से गाद (बाढ़ में बहकर आई मिट्टी) हटाने के लिए मिलने वाली सहायता राशि को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 23,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। भूस्खलन और हिमस्खलन से जमीन को हुए नुकसान पर अब 47,000 की जगह 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। सरकार के अनुसार, आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक सहायता दी जाएगी, जबकि सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक पीने के पानी की मदद का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, सरकार ने मकान, स्कूल, सड़क और अस्पताल की मरम्मत के लिए भी नए नियम तय किए हैं। मैदानी इलाकों में पूरी तरह से टूट चुके घर के लिए 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी इलाकों में 2.06 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं, मैदानी इलाकों में आंशिक रूप से (थोड़े बहुत) क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 93,000 रुपये की मदद दी जाएगी।