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Home› Khabar Junction› Government Plan To Start Crushing 15 Days Early Hits A Snag Only 19 Mills Operational In Up So Far High Mois

15 दिन पहले पेराई शुरू करने का सरकारी प्लान अटका : UP में अब तक 19 मिलें ही चालू, गन्ने में ज्यादा नमी रोड़ा

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 06 Nov 2026 11:27 AM IST
सार

  • उत्तर प्रदेश में गन्ने में नमी बढ़ने से चीनी की रिकवरी करीब 1.5 प्रतिशत तक घटी।
  • बिजनौर की बरकतपुर चीनी मिल में रिकवरी घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई, जबकि सामान्य तौर पर 10 प्रतिशत की उम्मीद रहती है।
  • अधिक बारिश के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलों में पेराई शुरू होने में देरी हुई।
  • नवंबर के पहले पखवाड़े में नई चीनी की आवक घटने से कीमतों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आई।
  • उत्तर प्रदेश की कुल 122 चीनी मिलों में से अब तक केवल 19 में पेराई शुरू हो सकी है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश ने बिगाड़ा मिलों का काम।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश ने बिगाड़ा मिलों का काम। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मानसून की अच्छी बारिश के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई मिलों में गन्ने की पेराई का काम देर से शुरू हुआ है। बाजार में नई चीनी की आवक घटने से नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी के दामों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आ गई है। प्रदेस सरकार ने बाजार में चीनी की सप्लाई को मजबूती देने के मकसद से 2026-27 के पेराई सत्र को सामान्य समय से करीब 15 दिन पहले शुरू करने की योजना बनाई थी। लेकिन, गन्ने में ज्यादा नमी होने के कारण चीनी की रिकवरी प्रभावित हुई है, जिससे मिलों को अपने काम के समय में बदलाव करना पड़ा है।

गन्ने में मिठास घटने से बढ़ी उत्पादन लागत
लखीमपुर खीरी के बाद उत्तर प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े गन्ना उत्पादक जिले बिजनौर में इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। शुरुआती आकलनों के अनुसार, पिछले साल इसी समय की तुलना में इस बार चीनी की रिकवरी करीब 1.5 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। जिले की बरकतपुर चीनी मिल में रिकवरी घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई है, जबकि आमतौर पर 10 प्रतिशत की उम्मीद की जाती है।

सामान्य रूप से मिलें एक क्विंटल गन्ने से कम से कम 10 किलो चीनी निकालती हैं। रिकवरी घटने का सीधा असर यह होता है कि मिलों को उतनी ही चीनी बनाने के लिए अधिक मात्रा में गन्ने की पेराई करनी पड़ती है, जिससे उत्पादन का खर्च बढ़ जाता है। बरकतपुर मिल की नए सत्र की चीनी की कीमत 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक नई चीनी की आवक नहीं सुधरती, तब तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। उत्तर प्रदेश संग महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी भारी बारिश के कारण गन्ने से चीनी की रिकवरी कम दर्ज की गई है।

गन्ने की कुल फसल बेहतर, जल्द चलेंगी बाकी मिलें
सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार, जिले में इस साल लगभग 1,400 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में करीब 900 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसी अधिक बारिश के कारण गन्ने में चीनी की मात्रा पर असर पड़ा है।

हालांकि, उप गन्ना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि रिकवरी कम होने के बावजूद गन्ने की फसल की समग्र स्थिति अच्छी है। इस साल गन्ने की कुल पैदावार में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे आगे चलकर कुल चीनी उत्पादन भी बेहतर रह सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस साल फसलों में बीमारियां काफी सीमित रही हैं। राज्य में पेराई की स्थिति पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की कुल 122 चीनी मिलों में से 19 मिलों में पेराई का काम शुरू हो चुका है और बाकी बची मिलों को भी जल्द चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। पेराई में हुई इस देरी ने भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी लाने का काम किया है।


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