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ग्रामीण पेयजल जांच में UP की छलांग : देश में दूसरा स्थान हासिल, महिलाएं जल की गुणवत्ता परखने में जुटीं...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 30 Oct 2026 05:55 PM IST
सार

  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता जांच के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंचा
  • 27 अक्टूबर 2026 तक यूपी ने जल जांच के सालाना लक्ष्य का 33.95% हासिल किया
  • कर्नाटक 69.32% उपलब्धि के साथ पहले और तमिलनाडु 28.42% के साथ तीसरे स्थान पर है
  • प्रदेश के 97,071 गांवों में जल गुणवत्ता जांच के लिए 11.64 लाख से अधिक परीक्षणों का लक्ष्य
  • फील्ड टेस्टिंग किट से पानी की जांच के अभियान में करीब 4.85 लाख महिलाएं जुड़ीं

ग्रामीण पेयजल जांच में यूपी ने तमिलनाडु का पछाड़ा।
ग्रामीण पेयजल जांच में यूपी ने तमिलनाडु का पछाड़ा। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता जांच के मामले में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। 27 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश ने फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) के माध्यम से जल गुणवत्ता जांच के अपने वार्षिक लक्ष्य का 33.95 प्रतिशत हासिल किया है। इस सूची में कर्नाटक 69.32 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पहले स्थान पर है, जबकि तमिलनाडु 28.42 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में इस अभियान से करीब 4.85 लाख महिलाएं भी जुड़ी हैं, जिन्हें जल जांच के काम में रोजगार मिला है।

विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 97,071 गांव हैं। इनमें जल गुणवत्ता जांच के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11,64,852 जांच का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। 27 अक्टूबर तक प्रदेश ने इस लक्ष्य का 33.95 प्रतिशत पूरा कर लिया था। यह उपलब्धि जल गुणवत्ता जांच के राष्ट्रीय औसत 12.83 प्रतिशत से अधिक है।

97 हजार से अधिक गांवों में जल जांच का लक्ष्य
यूपी जल निगम ग्रामीण के अनुसार, प्रदेश के सभी 97,071 गांवों में जल गुणवत्ता की जांच के लिए सालाना 11.64 लाख से अधिक परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए फील्ड टेस्टिंग किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता की जांच की जाती है, ताकि पानी से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान की जा सके और जरूरत के अनुसार आगे कदम उठाए जा सकें।

27 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश ने अपने वार्षिक लक्ष्य का 33.95 प्रतिशत हासिल किया था। विभाग के आंकड़ों में यह उपलब्धि राष्ट्रीय औसत से 21.12 प्रतिशत अंक अधिक है।

जल गुणवत्ता जांच में पांच राज्यों की स्थिति
27 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एफटीके के माध्यम से जल गुणवत्ता जांच में पांच बड़ा राज्यों का हाल-

  • कर्नाटक: 69.32 प्रतिशत
  • उत्तर प्रदेश: 33.95 प्रतिशत
  • तमिलनाडु: 28.42 प्रतिशत
  • आंध्र प्रदेश: 24.39 प्रतिशत
  • असम: 7.30 प्रतिशत

इस रैंकिंग में उत्तर प्रदेश दूसरे पायदान पर है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर जल गुणवत्ता जांच का औसत 12.83 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

4.85 लाख महिलाएं जल जांच अभियान से जुड़ीं
जल गुणवत्ता जांच के काम में महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। विभाग के अनुसार, प्रदेश के प्रत्येक राजस्व गांव में पांच महिलाओं को इस काम की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश में करीब 4.85 लाख महिलाएं केंद्र सरकार के डब्ल्यूक्यूएमआईएस पोर्टल पर फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से जल परीक्षण के लिए पंजीकृत हैं।

इस व्यवस्था के तहत महिलाएं गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच कर रही हैं। इससे उन्हें रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।


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