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छत्तीसगढ़ : बिलासपुर के तखतपुर और सेंदरी में लगेंगे दो नए बायोगैस प्लांट, कृषि अवशेषों से बढ़ेगी किसानों की आय

गांव जंक्शन डेस्क, बिलासपुर Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 04 Nov 2026 07:09 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर और सेंदरी में दो नए बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिनमें पराली, भूसी, गोबर और शहरी गीले कचरे से जैव ईंधन बनेगा। तखतपुर का संयंत्र रिलायंस बायो एनर्जी लिमिटेड का है और इसकी क्षमता 22.5 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। सेंदरी का बीपीसीएल का संयंत्र अप्रैल-मई तक शुरू होने की संभावना है।

बायोगैस प्लांट में पराली, भूसी, गोबर और शहरी गीला कचरा कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होगा।
बायोगैस प्लांट में पराली, भूसी, गोबर और शहरी गीला कचरा कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होगा। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर और सेंदरी में दो नए बायोगैस प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इनमें खेतों से निकलने वाली पराली, भूसी, मवेशियों का गोबर और शहरी निकायों का गीला कचरा कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होगा। प्रशासन का मानना है कि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए बायोफ्यूल जैसे वैकल्पिक साधनों का उपयोग बढ़ाना जरूरी है।

किसानों को मिलेगा आर्थिक लाभ: सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) अनुश्रवण समिति की बैठक में किसानों को परियोजना से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। खेतों में अनुपयोगी पड़े कृषि अवशेष प्लांट में कच्चे माल के रूप में लिए जाएंगे, जिससे किसानों को इसका आर्थिक मूल्य मिलेगा। कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को आपूर्ति प्रक्रिया और इसके लाभों की जानकारी दे। बायोगैस निर्माण के दौरान उप-उत्पाद के रूप में जैविक खाद भी बनेगी, जिसके उपयोग और बिक्री की व्यवस्था की जाएगी।

तखतपुर में कृषि आधारित संयंत्र: अधिकारिक जानकारी के अनुसार तखतपुर में रिलायंस बायो एनर्जी लिमिटेड कृषि अपशिष्ट आधारित सीबीजी संयंत्र लगा रही है। इसकी क्षमता प्रतिदिन 22.5 मीट्रिक टन गैस उत्पादन की होगी, और इससे क्षेत्र में कृषि अपशिष्ट के निपटान में मदद मिलेगी। संयंत्र के लिए उद्योग विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां लेने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

सेंदरी संयंत्र अप्रैल-मई तक: सेंदरी में बीपीसीएल द्वारा प्रस्तावित बायोगैस प्लांट के आने वाले अप्रैल या मई तक शुरू होने की प्रबल संभावना है। यह पूरी तरह नगरीय निकायों से रोज एकत्र होने वाले गीले कचरे पर आधारित होगा, जिसमें प्रतिदिन लगभग 10 टन गीले कचरे से गैस बनाई जाएगी।
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