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बिहार :वैशाली में ब्रोमैटो तकनीक को मिलेगा बढ़ावा, एक ही पौधे से मिलेंगे बैंगन और टमाटर

गांव जंक्शन डेस्क, वैशाली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 04 Nov 2026 07:04 PM IST
सार

बिहार के वैशाली जिले में सीमित भूमि में अधिक उत्पादन के लिए ब्रोमैटो तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण योजना के तहत सभी 16 प्रखंडों के प्रगतिशील किसानों को पौधे बांटे गए हैं। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के अनुसार एक पौधे से औसतन 2.75 किलोग्राम बैंगन और 3.50 किलोग्राम टमाटर मिल सकता है।

ब्रोमैटो कलम बांधने की तकनीक है, जिससे एक ही पौधे से बैंगन व टमाटर दोनों प्राप्त कर सकते हैं।
ब्रोमैटो कलम बांधने की तकनीक है, जिससे एक ही पौधे से बैंगन व टमाटर दोनों प्राप्त कर सकते हैं। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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आधुनिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देने और सीमित भूमि में अधिक पैदावार के लक्ष्य से वैशाली जिले में ब्रोमैटो तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) योजना के इनोवेटिव मद से जिले के सभी 16 प्रखंडों के प्रगतिशील किसानों के बीच ब्रोमैटो के पौधे वितरित किए गए।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने किसानों को यह तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार किसानों के लिए उपयोगी हैं और इनसे सीमित भूमि में भी उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

क्या है ब्रोमैटो: यह ग्राफ्टिंग (कलम बांधने) की तकनीक है, जिसमें एक ही पौधे से बैंगन और टमाटर दोनों मिलते हैं। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने विकसित किया है। इसमें बैंगन के मजबूत और रोग सहने की क्षमता वाले पौधे को मूलवृंत (रूटस्टॉक) बनाया जाता है, जिस पर टमाटर और बैंगन के पौधों की ग्राफ्टिंग की जाती है।

उत्पादन और सहनशीलता: संस्थान की तकनीकी जानकारी के अनुसार एक ब्रोमैटो पौधे से औसतन 2.75 किलोग्राम बैंगन और 3.50 किलोग्राम टमाटर प्राप्त हो सकता है। एक पौधे से दो सब्जियां मिलने से किसानों को उत्पादन और मुनाफा बढ़ाने के बेहतर अवसर मिलेंगे, साथ ही उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग होता है। यह पौधा जलभराव, मिट्टी की लवणता और सूखे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामान्य पौधों की तुलना में बेहतर सामना कर सकता है।

छोटे किसानों और घरेलू बागवानी को लाभ: कृषि विभाग की यह पहल आधुनिक तकनीक को सीधे खेतों तक पहुंचाने की कोशिश है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन का अवसर मिलेगा और खेती की कुल लागत घटाने में मदद मिलेगी। सीमित स्थान वाले लोग किचन गार्डन, छत और गमलों में भी इसे लगा सकते हैं, जिससे घर पर ताजी सब्जियां उपलब्ध होंगी।
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