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Jharkhand To Promote Diversified Farming In 10 Lakh Hectares Of Fallow Paddy Land
झारखंड : धान कटाई के बाद 10 लाख हेक्टेयर परती खेतों में विविधीकृत खेती को मिलेगा बढ़ावा
गांव जंक्शन डेस्क, रांची
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 04 Nov 2026 07:19 PM IST
सार
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की 46वीं रबी अनुसंधान परिषद की बैठक में राज्य के करीब 10 लाख हेक्टेयर धान परती खेतों में चरणबद्ध विविधीकृत खेती पर जोर दिया गया। कृषि सचिव ने किसान-अनुकूल तकनीकें विकसित करने का आह्वान किया, जबकि विशेषज्ञों ने जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई की जरूरत बताई।
झारखंड के कृषि सचिव अबूबकर सिद्दीख पी ने वैज्ञानिकों से किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल तकनीकें विकसित करने को कहा है।
- फोटो : सोशल मीडिया
झारखंड में धान कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने के बजाय वहां चरणबद्ध तरीके से विविधीकृत खेती को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई गई है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में 46वीं रबी अनुसंधान परिषद की बैठक में राज्य के लगभग 10 लाख हेक्टेयर धान परती खेतों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
अनुसंधान खेतों तक पहुंचे : कृषि सचिव अबूबकर सिद्दीख पी ने वैज्ञानिकों से किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल तकनीकें विकसित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अनुसंधान प्रयोगशालाओं, शोध पत्रों या संग्रहालयों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ खेतों तक पहुंचे। उनके अनुसार कम लागत वाली और स्थानीय परिस्थितियों में आसानी से लागू होने वाली तकनीकें किसानों की आय और सामाजिक स्थिति सुधारने में मददगार होंगी।
परती खेतों में दूसरी फसलें उगाने और बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए ठोस कार्ययोजना की जरूरत बताई गई। कृषि विज्ञान केंद्रों को फसल सुधार, मृदा प्रबंधन, पौधा संरक्षण, जल संरक्षण और जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकें किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
जलवायु अनुकूल किस्मों पर जोर : विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एससी दुबे ने शोधकर्ताओं से गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के जरिए विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय पहचान मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने देर से बोई जाने वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली जलवायु अनुकूल किस्मों पर ध्यान देने तथा कटाई-पश्चात नुकसान घटाने वाली तकनीकें विकसित करने की बात कही।
जल संकट और सूक्ष्म सिंचाई : भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, नामकुम के निदेशक डॉ सुजय रक्षित ने कहा कि पर्याप्त वर्षा के बावजूद झारखंड के कई इलाकों में अक्तूबर के बाद जल संकट गहराने लगता है। इसके लिए वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और पानी के पुनर्चक्रण पर ध्यान देना होगा, साथ ही स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसी सूक्ष्म सिंचाई का व्यापक प्रचार जरूरी है। विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों की कमी पर भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थानों के बीच समझौते के तहत संस्थान अपने वैज्ञानिकों की सेवाएं विश्वविद्यालय को देने को तैयार है।
कृषि शोध में योगदान के लिए डॉ शंभूनाथ करमाकर, डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती और डॉ अरविंद कुमार सहित कई वैज्ञानिकों को शॉल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। प्रगतिशील किसानों में चान्हो के सिलागाईं गांव की गुड़िया कुमारी और बुंडू के खखरा गांव के प्यारे लाल महतो को सम्मान मिला।
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