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Tamil Nadu Traders Furious Over Ban On New Tea Factories Say Small Farmers Will Get Lower Prices
तमिलनाडु : नई चाय फैक्ट्रियों पर रोक से भड़के कारोबारी, बोले- छोटे किसानों को मिलेगा कम दाम
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 04 Nov 2026 04:24 PM IST
सार
चाय बोर्ड ने नई सीटीसी चाय फैक्ट्रियां खोलने के आवेदन रोक दिए हैं। कुन्नूर के कारोबारियों ने फैसले का विरोध करते हुए कहा कि इससे छोटे चाय किसानों को नुकसान और नए निवेश पर असर पड़ सकता है।
तमिलनाडु के कुन्नूर में चाय कारोबारियों ने चाय बोर्ड के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें नई सीटीसी (CTC) चाय फैक्ट्रियां खोलने के लिए नए आवेदन लेने पर रोक लगा दी गई है। कारोबारियों का कहना है कि इस फैसले से चाय उद्योग में प्रतिस्पर्धा कम होगी, नए निवेश पर असर पड़ेगा और हजारों छोटे चाय किसानों को नुकसान हो सकता है।
चाय निर्माताओं ने चाय बोर्ड को पत्र लिखकर इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह फैसला उद्योग से जुड़े लोगों से बातचीत किए बिना लिया गया है। उन्होंने मांग की है कि जब तक उनकी चिंताओं पर विचार नहीं होता, तब तक इस फैसले को लागू न किया जाए।
नीलगिरी में 200 से ज्यादा चाय फैक्ट्रियां
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में फिलहाल करीब 200 से 250 ऐसी चाय फैक्ट्रियां हैं, जो छोटे किसानों से हरी चाय की पत्तियां खरीदकर उनसे चाय तैयार करती हैं। देशभर में ऐसी फैक्ट्रियों की संख्या करीब 1,000 है।
कारोबारियों का कहना है कि चाय बोर्ड ने नए आवेदन रोकने के फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। कुछ साल पहले भी इसी तरह की रोक लगाई गई थी, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों के विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया था।
फैक्ट्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा से किसानों को फायदा
चाय उत्पादकों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में उद्योग में नए कारोबारियों के आने और फैक्ट्रियों की संख्या बढ़ने से छोटे चाय किसानों को फायदा हुआ है। अब किसानों को अपनी हरी चाय की पत्तियां बेचने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती। अधिक उत्पादन के समय भी उन्हें खरीदार मिल जाते हैं और बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है। फैक्ट्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से किसानों की मोलभाव करने की ताकत भी बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि नई फैक्ट्रियां खोलने पर रोक से यह स्थिति प्रभावित हो सकती है।
पुरानी मशीनों से चाय की गुणवत्ता पर असर
कारोबारियों का कहना है कि कुछ पुरानी फैक्ट्रियां अब भी पुराने उपकरणों और कमजोर उत्पादन तकनीक से काम कर रही हैं। इनकी उत्पादन क्षमता सीमित है और ये बेहतर गुणवत्ता वाली चाय तैयार नहीं कर पातीं। इससे बाजार में चाय की कीमत कम मिलती है और किसानों को भी हरी पत्तियों का कम दाम मिलता है।
इसके उलट, आधुनिक मशीनों और बेहतर तकनीक वाली फैक्ट्रियां उसी हरी पत्ती से अच्छी गुणवत्ता की चाय तैयार कर सकती हैं। ऐसी चाय बाजार में बेहतर कीमत हासिल कर सकती है। इसका फायदा किसानों को भी मिल सकता है।
चाय बोर्ड ने कारोबार को आसान बनाने का दिया तर्क
चाय बोर्ड का कहना है कि नई गाइडलाइन केंद्र सरकार की कारोबार को आसान बनाने की पहल यानी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के अनुरूप जारी की गई है। इसका उद्देश्य भारतीय चाय उद्योग को मजबूत करना और वर्ष 2030 तक देश में चाय उत्पादन 2,000 मिलियन किलोग्राम तक पहुंचाने के लक्ष्य में मदद करना है।
हालांकि, चाय निर्माताओं ने बोर्ड से मांग की है कि किसी भी तरह की रोक लगाने से पहले हरी चाय पत्तियों की उपलब्धता, फैक्ट्रियों की क्षमता, चाय की गुणवत्ता, बाजार में मिलने वाली कीमत और किसानों पर प्रतिस्पर्धा के असर का अध्ययन किया जाए।
कारोबारियों का कहना है कि चाय उद्योग से जुड़े सभी पक्षों- फैक्ट्री मालिकों, चाय बागान संचालकों, नए निवेशकों और छोटे चाय किसानों के प्रतिनिधियों—से बातचीत के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, छोटे किसानों के हितों की रक्षा के लिए नई तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण सुविधाएं और फैक्ट्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा जरूरी है।
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