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कम बारिश से हल्दी की बुवाई 20-30% गिरी : मंडी में दाम ₹23,000 क्विंटल के पार, हाल के सालों में रिकॉर्ड स्तर

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 15 Oct 2026 10:12 PM IST
सार

  • तमिलनाडु की पेरुंदुरई मंडी में हल्दी का भाव 23,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंचा
  • एक हफ्ते में फिंगर हल्दी की अधिकतम कीमत 3,855 रुपये बढ़ी
  • प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे से हल्दी की बुवाई का रकबा घटने की आशंका
  • सिंचाई के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से फसल पर असर की चिंता

हल्दी की कीमतों में आई तेजी, कमजोर मानसून ने बिगाड़ा गणित।
हल्दी की कीमतों में आई तेजी, कमजोर मानसून ने बिगाड़ा गणित। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बुधवार को पेरुंदुरई मंडी में हल्दी के दाम 23,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए। यह बीते सालों में हल्दी का रिकॉर्ड स्तर है। बाजार में हल्दी की कम आवक, प्रमुख उत्पादक इलाकों में कम बारिश और अगली फसल पर खतरे की संभावना के चलते आने वाले हफ्तों में भी कीमतों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

मंडियों में हल्दी के भाव और एक हफ्ते का अंतर
हल्दी की खेती मुख्य रूप से इरोड, धर्मपुरी जिलों और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में की जाती है। इसकी खरीद-बिक्री इरोड और पेरुंदुरई की मंडियों के साथ-साथ करंगलपलायम और गोबिचेट्टीपलायम की कृषि उत्पादक सहकारी विपणन समितियों में होती है।

बुधवार को पेरुंदुरई मंडी में 'फिंगर' (गट्ठानुमा) हल्दी का भाव 15,336 रुपये से 23,099 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा। वहीं, 'बल्ब' (गोल) हल्दी की कीमत 15,099 रुपये से 19,626 रुपये के बीच दर्ज की गई।

इससे पहले, 7 अक्टूबर को इरोड मंडी में फिंगर हल्दी का भाव 13,509 रुपये से 19,244 रुपये और बल्ब हल्दी का भाव 7,599 रुपये से 17,729 रुपये प्रति क्विंटल था। बीते एक हफ्ते के आंकड़ों की तुलना करें, तो फिंगर और बल्ब हल्दी की अधिकतम कीमतों में क्रमश 3,855 रुपये और 1,897 रुपये की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सूखे के कारण उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका
इरोड हल्दी मर्चेंट्स एंड गोडाउन ओनर्स एसोसिएशन के सचिव एम. सत्यमूर्ति के अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, तेलंगाना के निजामाबाद और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों सहित प्रमुख हल्दी उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की स्थिति कीमतों को ऊपर धकेल रही है।

उन्होंने बताया कि पानी की कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में हल्दी की बुवाई का रकबा पहले ही 20% से 30% तक घट चुका है और आने वाले महीनों में खेती में और कमी आने की आशंका है। उनके मुताबिक, "सूखे का असर काफी गहरा होने की उम्मीद है, जिससे अगले साल हल्दी के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।"

वायदा बाजार में तेजी और सिंचाई का संकट
एम. सत्यमूर्ति के अनुसार, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर अप्रैल 2027 के लिए हल्दी का वायदा भाव 24,000 रुपये से 25,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जो बाजार में तेजी (बुलिश) का स्पष्ट संकेत देता है। उन्होंने आगे कहा कि नवंबर में फसल की स्थिति और 'अल नीनो' (El Niño) का प्रभाव आने वाले महीनों में कीमतों को तय करेगा।

वर्तमान में सिंचाई के लिए भवानीसागर बांध से लोअर भवानी प्रोजेक्ट (LBP) और कलिंगरायन नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जो हल्दी की खेती वाले प्रमुख इलाके हैं। हालांकि, इस हफ्ते शुरू होने वाले पूर्वोत्तर मानसून की बारिश से पानी की कमी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इन हालात और कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए, जिन किसानों ने अपनी उपज का भंडारण कर रखा है, वे आगे दाम और बढ़ने की उम्मीद में अभी हल्दी बेचने से कतरा रहे हैं।


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