खेतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल, कम पानी और खराब मिट्टी में फसल उगाने की तकनीक, पोषण से भरपूर बीज और खेती की लागत घटाने वाले नए प्रयोग। कृषि क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक के ऐसे ही नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पेश किया जाएगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने 27 से 29 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 में कृषि अनुसंधान की भूमिका और प्राथमिकताओं की जानकारी दी। इस आयोजन में 50 डीप-टेक स्टार्टअप समेत कृषि और विज्ञान से जुड़ी कई तकनीकों को प्रदर्शित किया जाएगा।
12 प्रमुख क्षेत्रों में दिखेंगी नई तकनीकें
हरियाणा के करनाल स्थित ICAR-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) में गुरुवार को ESTIC 2026 को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कृषि तकनीक, खाद्य व्यवस्था और पोषण के क्षेत्र में परिषद के कामकाज की जानकारी दी।
ESTIC 2026 में विज्ञान और तकनीक से जुड़े 12 प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति दिखाई जाएगी। आयोजन में 13 विभागीय स्टॉल, 50 डीप-टेक स्टार्टअप और विभिन्न विभागों की 10 तकनीकों को प्रदर्शित करने की योजना है। इसका उद्देश्य शोध के नतीजों को किसानों और आम लोगों के काम आने वाली तकनीकों से जोड़ना है।
जीन एडिटिंग से विकसित चावल की किस्में होंगी आकर्षण
ICAR के मुताबिक, कृषि अनुसंधान में जीन एडिटिंग, पोषण से भरपूर फसल किस्मों, जलवायु के अनुकूल खेती, कीट प्रबंधन, बागवानी, पशु स्वास्थ्य, मत्स्य पालन और कृषि मशीनीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में जीन एडिटिंग से विकसित दुनिया की पहली दो चावल की किस्मों और अरहर के पहले टेलोमियर-टू-टेलोमियर (T2T) संदर्भ जीनोम को प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों के रूप में पेश किया जाएगा। इन तकनीकों से फसलों के गुणों में सुधार और उत्पादकता बढ़ाने से जुड़े शोध को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डॉ. जाट ने कहा कि वैज्ञानिक शोध का फायदा तभी है, जब नई तकनीक प्रयोगशालाओं से निकलकर किसानों के खेतों तक पहुंचे। इसके लिए बेहतर बीज व्यवस्था, तकनीक का प्रसार और खेतों में उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है।
मिट्टी की जांच और खेती में AI का इस्तेमाल
कॉन्क्लेव में ‘सॉइल इंटेलिजेंस: AI और मृदा विज्ञान’ के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मिट्टी से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन के इस्तेमाल को दिखाया जाएगा। इससे मिट्टी के गुणों को समझने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
ICAR मृदा स्वास्थ्य, पानी के बेहतर प्रबंधन और जलवायु के अनुकूल खेती पर भी काम कर रहा है। करनाल स्थित CSSRI में खारी और लवण प्रभावित मिट्टी को सुधारने, खराब गुणवत्ता वाले पानी के प्रबंधन और ऐसी परिस्थितियों को सहन करने वाली फसल किस्मों पर शोध किया जा रहा है।
खाद और ऊर्जा के क्षेत्र में भी नए प्रयोग
कार्यक्रम में ग्रीन अमोनिया से जुड़े शोध को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस तकनीक में सौर ऊर्जा से तैयार हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके अमोनिया बनाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। अमोनिया का उपयोग उर्वरक बनाने में होता है। इस क्षेत्र से जुड़े प्रदर्शनों में छह राज्यों के 10,000 एकड़ क्षेत्र में किए गए काम को भी शामिल किया गया है। इस पहल में ICAR, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों का सहयोग रहा है।
बागवानी की 117 किस्में विकसित
डॉ. जाट ने बताया कि ICAR ने पिछले वर्ष बागवानी फसलों की 117 किस्में विकसित की थीं। संस्थान पोषण से भरपूर फसलों, बेहतर बीजों और खेती में विविधता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को नई किस्मों के विकल्प देना और टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, कीटों के एकीकृत प्रबंधन, पशुओं के स्वास्थ्य, मत्स्य पालन और खेती में मशीनों के इस्तेमाल पर भी शोध किया जा रहा है। खारे इलाकों में झींगा पालन और कपास की कटाई के लिए मशीनों जैसे प्रयोगों के जरिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और खेती के काम को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पशु स्वास्थ्य और दूध में मिलावट की जांच पर भी जोर
कॉन्क्लेव में पशुओं की बीमारियों से बचाव के लिए टीकों से जुड़े शोध और देसी पशु नस्लों के संरक्षण को भी प्रदर्शित किया जाएगा। ICAR और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की संयुक्त पहल SEHAT के तहत कृषि, भोजन और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर काम किया जा रहा है। इसमें पोषण से भरपूर फसलों और एकीकृत खेती जैसे विषय शामिल हैं। ICAR के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) ने दूध में मिलावट की शुरुआती पहचान के लिए मौके पर इस्तेमाल की जा सकने वाली एक त्वरित जांच किट भी विकसित की है।
कृषि, खाद्य व्यवस्था और पोषण पर होगा मंथन
ESTIC 2026 के कृषि तकनीक, खाद्य व्यवस्था और पोषण से जुड़े सत्र में विशेषज्ञ कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी विषयों पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम में डॉ. इस्माहाने एलौफी मुख्य वक्ता होंगी। डॉ. अश्वनी पारेक और प्रो. पीयूष सोनी सहित अन्य विशेषज्ञ भी सत्र में हिस्सा लेंगे।
इस आयोजन के जरिए कृषि क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक शोध और तकनीकी विकास को सामने लाने की कोशिश की जाएगी। इसका प्रमुख उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ बनाना, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मजबूत करना और नई तकनीकों का लाभ किसानों तक पहुंचाना है।
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