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Basmati Rice: कुल चावल निर्यात बढ़ा, लेकिन बासमती को झटका, चार महीने में 2.12 लाख टन की गिरावट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 12:27 PM IST
सार

अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत का कुल चावल निर्यात 10.6 फीसदी बढ़कर 74.38 लाख टन पहुंच गया, लेकिन बासमती निर्यात 9.4 फीसदी घटकर 20.35 लाख टन रह गया। गैर-बासमती चावल के निर्यात में 20.7 फीसदी की बढ़ोतरी ने कुल निर्यात को संभाला।

बासमती चावल
बासमती चावल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव का असर अब भारत के बासमती चावल के निर्यात पर दिखाई देने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में देश का कुल चावल निर्यात तो बढ़ा है, लेकिन बासमती चावल के निर्यात में 2.12 लाख टन की कमी आई है।

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भारत ने 20.35 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 22.47 लाख टन था। यानी इस साल बासमती के निर्यात में 2.12 लाख टन या करीब 9.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

कुल चावल निर्यात 10.6 फीसदी बढ़ा
बासमती में गिरावट के बावजूद देश के कुल चावल निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत से 74.38 लाख टन चावल का निर्यात हुआ। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 67.24 लाख टन था। इस तरह कुल चावल निर्यात में 7.14 लाख टन यानी करीब 10.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

गैर-बासमती चावल ने संभाला निर्यात
कुल चावल निर्यात में बढ़ोतरी की मुख्य वजह गैर-बासमती चावल रहा। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में गैर-बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 54.03 लाख टन हो गया। पिछले साल अप्रैल-जुलाई के दौरान यह 44.77 लाख टन था। यानी गैर-बासमती चावल के निर्यात में 9.26 लाख टन, करीब 20.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी ने बासमती चावल के निर्यात में आई कमी की भरपाई करने में मदद की।

बासमती कारोबार पर पश्चिम एशिया का असर
भारत के बासमती चावल के कारोबार में पश्चिम एशिया का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में क्षेत्र में जारी युद्ध और अस्थिरता से निर्यात कारोबार प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। शुरुआती चार महीनों के आंकड़े भी बासमती निर्यात में कमी की ओर इशारा कर रहे हैं। वहीं, गैर-बासमती चावल के निर्यात में मजबूत बढ़ोतरी के कारण भारत का कुल चावल निर्यात पिछले साल की तुलना में अधिक रहा है।
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