त्योहारी सीजन से ठीक पहले खाद्य तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में 7 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के प्लान को फिलहाल टालने का फैसला किया है। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में खाद्य तेलों केो आयात शुल्क में की गई कटौती के बाद कंपनियों को बढ़ी हुई वैश्विक लागत को खुद वहन करने की गुंजाइश मिल गई है। इससे अक्तूबर और नवंबर के त्योहारी महीनों में आम उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों की महंगाई से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक लागत बढ़ने के बावजूद क्यों टली कीमतें?
जानकारों का कहना है कि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, मालभाड़े और बीमा खर्च में तेजी, रुपये में गिरावट और इंडोनेशिया जैसे बड़े निर्यातक देशों द्वारा खाद्य तेल को बायोफ्यूल में इस्तेमाल किए जाने के कारण आयातित तेल की पहुंच लागत (लैंडेड कॉस्ट) में 8 से 11 प्रतिशत की वृद्धि हो गई थी। इसी बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए कंपनियां खुदरा भाव 7 से 8 प्रतिशत बढ़ाने की तैयारी कर रही थीं।
हालांकि, सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों को संकेत दिया था कि अक्टूबर-नवंबर के त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को स्थिर रखा जाए, क्योंकि इस समय मिठाइयों और तले हुए खाद्य पदार्थों की मांग काफी बढ़ जाती है। आयात शुल्क घटने के बाद अब कंपनियां इस बढ़ोतरी को टालने और बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा खुद वहन करने में सक्षम हो गई हैं। इमामी ग्रुप के निदेशक आदित्य अग्रवाल के अनुसार, खाद्य तेलों की जो पहुंच लागत 8 से 11 प्रतिशत बढ़ गई थी, वह अब कम हो जाएगी। वहीं जेमिनी एडिबल्स के समूह उपाध्यक्ष अक्षय चौधरी का कहना है कि आगामी त्योहारों को देखते हुए यह फैसला उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों से राहत देगा और बाजार में मांग बढ़ाएगा।
आयात शुल्क में कटौती से कंपनियों को मिली राहत
सरकार द्वारा की गई कटौती के बाद कच्चे पाम और कच्चे सोयाबीन तेल पर प्रभावी आयात शुल्क (सेस और अतिरिक्त शुल्क सहित) 16.5 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत रह गया है। वहीं कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म होने से इस पर प्रभावी शुल्क 16.5 प्रतिशत से गिरकर मात्र 5.5 प्रतिशत पर आ गया है।
रिफाइंड तेलों की बात करें तो रिफाइंड सोयाबीन और पाम तेल पर प्रभावी शुल्क 35.75 प्रतिशत से घटाकर 30.25 प्रतिशत और रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर 24.75 प्रतिशत कर दिया गया है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधाकर देसाई के मुताबिक, इस कटौती से आयात लागत सुधरेगी और विशेष रूप से दक्षिण भारत में सूरजमुखी तेल काफी सस्ता हो सकेगा। इसके अलावा, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता के अनुसार, घरेलू आयात शुल्क घटने से नेपाल के रास्ते आने वाले सस्ते रिफाइंड तेल के बड़े प्रवाह पर भी लगाम लगेगी।
बाजार में पहले से ऊंचे हैं दाम, 58% तेल आयात करता है भारत
कीमतों में उछाल के दौर का थमना काफी अहम हो जाता है, क्योंकि देश में खाद्य तेलों का मौजूदा दाम पहले ही पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी सेल के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को खुदरा बाजार में सरसों का तेल 202.67 रुपये, सोयाबीन तेल 167.11 रुपये और पाम तेल 153.61 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। पिछले साल की तुलना में इन तेलों के भाव क्रमशः 8 प्रतिशत, 14 प्रतिशत और 16 प्रतिशत महंगे हैं।
भारत अपनी सालाना खाद्य तेल जरूरत का 58 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है और देश में हर साल करीब 16 मिलियन टन तेल बाहर से मंगाया जाता है। इससे पहले सरकार ने जून 2025 में भी कच्चे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल पर शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया था। अब नए आयात शुल्क में कटौती से कंपनियों द्वारा 7 से 8 प्रतिशत दाम बढ़ाने की योजना टल गई है, जिससे त्योहारी सीजन में रसोई के बजट को बड़ा सहारा मिलेगा।