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जमीन अपनी नहीं तो क्या, खेती तो करते हैं... : किरायेदार-बटाईदारों किसानों को भी PM-KISAN देने की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 24 Sep 2026 07:46 PM IST
सार

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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खेती की जमीन पर फसल उगाने वाले लेकिन जमीन के मालिक नहीं होने वाले किरायेदार किसानों और बटाईदारों को भी पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ देने की मांग उठी है। तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ ने केंद्र सरकार से पीएम-किसान योजना के नियमों में बदलाव करने की अपील की है। संगठन ने यह भी मांग की है कि योजना के तहत मिलने वाली सालाना सहायता 6,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये की जाए।

संघ के सचिव सुंदर विमल नाथन ने केंद्र सरकार को दिए प्रतिनिधित्व में कहा कि पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। यह राशि खेती, कृषि से जुड़ी गतिविधियों और घरेलू जरूरतों के खर्च में मदद करती है।

करीब 2 करोड़ किरायेदार किसान होने का दावा
संघ का कहना है कि देश में करीब 2 करोड़ किरायेदार किसान और बटाईदार हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और कृषि मजदूर परिवारों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। संगठन के मुताबिक, तमिलनाडु में करीब 4 लाख एकड़ कृषि भूमि पर किरायेदार किसान खेती करते हैं। कई परिवार पीढ़ियों से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। लेकिन जमीन उनके नाम नहीं होने के कारण उन्हें पीएम-किसान योजना का लाभ नहीं मिल पाता।

खेती के साथ देना पड़ता है किराया
संघ के सचिव ने कहा कि किरायेदार किसानों पर खेती की लागत के साथ जमीन का सालाना किराया देने का भी बोझ रहता है। कई किसान मंदिरों, मठों, धार्मिक संस्थाओं, चर्च, मस्जिदों, ट्रस्ट और निजी जमीन मालिकों की जमीन पर खेती करते हैं। उनके अनुसार, कई मामलों में किसानों को खेती की पूरी लागत उठाने के साथ करीब 10,000 से 12,000 रुपये सालाना लीज यानी किराया भी देना पड़ता है। ऐसे में योजना का लाभ नहीं मिलने से इन किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।

सत्यापन के बाद दिया जाए लाभ
संघ ने केंद्र सरकार से पीएम-किसान के दिशा-निर्देशों में जरूरी बदलाव करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि वास्तव में खेती करने वाले किरायेदार किसानों और बटाईदारों को उचित सत्यापन व्यवस्था के तहत योजना में शामिल किया जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि योजना का लाभ वास्तविक खेती करने वाले किसानों तक पहुंचे।

सहायता राशि 15 हजार रुपये करने की मांग
संगठन ने पीएम-किसान के तहत मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाने की भी मांग की है। उसका कहना है कि जब से योजना शुरू हुई है, तब से खेती की लागत और कृषि इनपुट के दाम बढ़े हैं। ऐसे में सालाना सहायता को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया जाना चाहिए।

हर पात्र किसान को मिले लाभ
संघ ने यह भी मांग की है कि योजना का लाभ हर उस पात्र किसान को दिया जाए, जो वास्तव में खेती कर रहा है। संगठन ने परिवार में केवल एक सदस्य तक लाभ सीमित रखने के बजाय पात्र किसानों को शामिल करने और लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा करने की मांग भी की है। ये मांगें तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ की ओर से केंद्र सरकार के सामने रखी गई हैं।
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