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गन्ने की खेती में AI का कमाल : 40% तक पानी बचत और 2% तक चीनी रिकवरी बढ़ने का दावा, जानें
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 24 Sep 2026 07:55 PM IST
सार
एआई आधारित तकनीक से गन्ने की उपज, पानी-खाद के इस्तेमाल और चीनी रिकवरी को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। परियोजना के तहत 10 हजार खेतों में परीक्षण और करीब 3 लाख किसानों तक तकनीक पहुंचाने की जानकारी दी गई।
नई तकनीक से किसानों को खेत की जरूरत के हिसाब से पानी और खाद देने में मदद मिल रही है। इससे खेती की लागत घटाने, गन्ने की पैदावार बढ़ाने और चीनी की रिकवरी सुधारने की कोशिश की जा रही है। बारामती के कृषि विकास प्रतिष्ठान के ट्रस्टी प्रतापराव पवार ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित गन्ने की खेती की तकनीक से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है, बल्कि चीनी मिलों को लंबे समय तक पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने और उत्पादन का सटीक अनुमान लगाने में भी मदद मिल रही है।
10 हजार खेतों में तकनीक का परीक्षण
राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ की ओर से आयोजित ‘सहकारी चीनी उद्योग सम्मेलन 2026’ में सोमवार, 21 सितंबर को प्रतापराव पवार ने यह जानकारी दी। सम्मेलन के ‘सटीक कृषि’ (प्रिसिजन फार्मिंग) सत्र में कृषि विकास प्रतिष्ठान की टीम ने गन्ने की खेती में एआई आधारित परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया।
कृषि विकास प्रतिष्ठान के डॉ. योगेश फाटक और जॉन कुरुविला ने परियोजना की तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एआई की मदद से खेत की स्थिति का विश्लेषण कर पानी और उर्वरकों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे गन्ने की उत्पादकता और किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ चीनी मिलों की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
परियोजना के तहत अब तक करीब 10 हजार किसानों के खेतों पर क्षेत्रीय परीक्षण किए जा चुके हैं। प्रदर्शन के जरिए करीब 3 लाख किसानों तक यह तकनीक पहुंचाई गई है, जबकि 10 हजार किसानों को प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया है।
25 से ज्यादा फसलों में इस्तेमाल
यह तकनीक सिर्फ गन्ने तक सीमित नहीं है। परियोजना के तहत गेहूं, चावल, सोयाबीन, केला, प्याज और हल्दी समेत 25 से अधिक फसलों में भी एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।इसका उद्देश्य खेत की जरूरत के अनुसार खेती के फैसले लेने में किसानों की मदद करना है। इससे पानी, खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
माइक्रोसॉफ्ट और ऑक्सफोर्ड का सहयोग
कृषि विकास प्रतिष्ठान की इस परियोजना में माइक्रोसॉफ्ट और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का सहयोग है। परियोजना से जुड़े संस्थानों ने पिछले तीन-चार वर्षों में इसमें करीब 250 से 300 करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी दी है।
बारामती में माइक्रोसॉफ्ट फार्मवाइब्स का भारत में पहला और दुनिया का दूसरा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ भी स्थापित किया गया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की लागत और आर्थिक समस्याओं को कम करना, उनकी आय बढ़ाना और चीनी उद्योग की कार्यक्षमता में सुधार करना है।
40 फीसदी तक पानी बचाने का दावा
परियोजना के प्रस्तुतीकरण में इसके कई नतीजे बताए गए। इनके अनुसार उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल में 30 से 40 फीसदी तक कमी आने का दावा किया गया। पानी की कम से कम 40 फीसदी बचत होने की बात कही गई है। खेत स्तर पर गन्ने के उत्पादन में 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज होने का दावा किया गया। ‘फार्म ऑफ द फ्यूचर’ प्रदर्शन क्षेत्र में उत्पादन में 60 फीसदी तक वृद्धि बताई गई। चीनी की रिकवरी में 0.5 से 2 फीसदी तक सुधार का दावा किया गया। गन्ने की फसल अवधि को 14 महीने से घटाकर 12 महीने तक करने में मदद मिलने की बात कही गई। गन्ने की कटाई की कार्यक्षमता में करीब 35 फीसदी बढ़ोतरी का दावा किया गया।
चीनी मिलों को भी मिलेगा फायदा
एआई तकनीक से खेत में मौजूद गन्ने की मात्रा और उसकी स्थिति का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। इससे चीनी मिलों को यह समझने में आसानी होगी कि आने वाले समय में कितनी मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकता है।
परियोजना के प्रस्तुतीकरण में उपग्रह तस्वीरों और जमीन से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर चीनी रिकवरी और गन्ना उत्पादन के अनुमान को 98 फीसदी से अधिक सटीक होने का दावा किया गया। इससे मिलों को गन्ने की उपलब्धता के आधार पर संचालन की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, आईओटी उपकरणों, उपग्रह तस्वीरों और खेतों की प्रत्यक्ष जांच के जरिए मिट्टी में जैविक कार्बन में हर साल 0.25 की वृद्धि का भी दावा किया गया है।
किसानों के लिए क्या मायने?
एआई आधारित खेती में खेत की स्थिति और फसल की जरूरत के आधार पर पानी, खाद और अन्य कृषि इनपुट के इस्तेमाल की योजना बनाने पर जोर दिया जाता है। इससे लागत घटाने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना में बताए गए उत्पादन, पानी की बचत और चीनी रिकवरी के आंकड़े परियोजना के प्रस्तुतीकरण में किए गए दावे हैं और इनका वास्तविक लाभ खेत, मौसम, मिट्टी, किस्म और स्थानीय प्रबंधन के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
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