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ट्यूना मछली को लेकर न हों परेशान : एक जगह मिले परजीवी तो सभी मछलियों को खराब न मानें: ICAR-CMFRI

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 24 Sep 2026 06:44 PM IST
सार

ब्राजील के पास ट्यूना में परजीवी मिलने की रिपोर्ट के बाद ICAR-CMFRI ने भारतीय उपभोक्ताओं को सलाह दी है। संस्थान के अनुसार भारतीय तट पर जांची गई मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं मिले हैं।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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ट्यूना मछली में परजीवी पाए जाने की खबरों के बाद भारतीय उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। ICAR-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI), कोच्चि ने कहा है कि किसी एक क्षेत्र में मछली में परजीवी मिलने की खबर के आधार पर भारत में मिलने वाली ट्यूना या दूसरी मछलियों को खाना बंद नहीं करना चाहिए।

संस्थान के मुताबिक, भारतीय तट पर जांच की गई मछलियों, जिनमें ट्यूना भी शामिल है, में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं मिले हैं। किसी दूसरे समुद्री क्षेत्र में सामने आए मामले को भारतीय पानी में पकड़ी जाने वाली उसी प्रजाति की मछलियों पर लागू नहीं किया जा सकता।

ब्राजील के पास पकड़ी गई मछलियों से जुड़ी थी रिपोर्ट
ICAR-CMFRI की यह सलाह उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें स्किपजैक ट्यूना में परजीवी पाए जाने का जिक्र था। यह अध्ययन ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर से पकड़ी गई मछलियों पर किया गया था। संस्थान ने बताया कि मछलियों में परजीवी की मौजूदगी और उनकी संख्या अलग-अलग मछलियों और अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में बदल सकती है। इसका संबंध वहां की पर्यावरणीय परिस्थितियों और परजीवी के जीवन चक्र में मदद करने वाले छोटे जीवों, जैसे कोपेपॉड, की उपलब्धता से भी हो सकता है।

भारतीय तट पर मछलियों की नियमित जांच
ICAR-CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिनसन जॉर्ज ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिक मछली जीव विज्ञान से जुड़े अध्ययनों के दौरान ट्यूना समेत विभिन्न मछलियों की नियमित जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर मछलियों में किसी तरह की असामान्यता और परजीवी की भी जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि संस्थान की ओर से जांची गई मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं पाए गए हैं।

एक जगह के नतीजे को हर जगह लागू नहीं कर सकते
ICAR-CMFRI ने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों में मछलियों में पाए जाने वाले परजीवियों की मौजूदगी का इस्तेमाल अलग-अलग मछली समूहों या उनकी आबादी की पहचान के लिए भी किया जाता है। इसलिए किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में मछली की जांच के दौरान मिले नतीजों को उसी प्रजाति की दूसरी जगह मिलने वाली मछलियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

मछली साफ करते समय आंतें निकालना जरूरी
संस्थान ने मछली से जुड़े खाद्य सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सावधानियां भी बताई हैं। मछली की सफाई और उसे तैयार करते समय आंत और दूसरे अंदरूनी अंगों को ठीक से निकालना जरूरी है। इसके अलावा मछली को अच्छी तरह पकाना भी महत्वपूर्ण है। उचित तापमान पर खाना पकाने से परजीवी नष्ट हो जाते हैं और उनसे जुड़े खाद्य सुरक्षा के जोखिम काफी कम हो जाते हैं।

कच्ची मछली खाने में ज्यादा सावधानी जरूरी
कुछ देशों में कच्ची या कम पकी समुद्री मछली खाने की परंपरा है। ऐसे मामलों में उस क्षेत्र में परजीवी की मौजूदगी अधिक होने पर जोखिम बढ़ सकता है।भारत में आम तौर पर मछली को अच्छी तरह पकाकर खाया जाता है। अधिक तापमान पर पकाने से खाद्य सुरक्षा का एक अतिरिक्त उपाय मिलता है।

मछली खाना बंद करने की जरूरत नहीं
ICAR-CMFRI ने दोहराया कि किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की मछली में परजीवी मिलने की खबर के आधार पर ट्यूना या बाजार में उपलब्ध दूसरी मछलियां खाना बंद करने की जरूरत नहीं है। उपभोक्ताओं को मछली की सही तरीके से सफाई, संभालने और अच्छी तरह पकाने पर ध्यान देना चाहिए। इससे संभावित जोखिम कम किए जा सकते हैं और मछली व अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों से मिलने वाले पोषण का लाभ भी लिया जा सकता है।
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