तेलंगाना में सूखे और कम बारिश से खरीफ फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों ने राज्य सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है। किसान संगठनों ने धान, कपास, मिर्च और सब्जियों की बर्बाद फसलों के लिए प्रति एकड़ 20 हजार से 50 हजार रुपये तक मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही, राज्य में पानी की उपलब्धता पर श्वेत पत्र जारी करने और सूखा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठाई है।
यह मांग ऐसे समय की गई है, जब राज्य सरकार ने किसानों को आगामी रबी सीजन में धान की बुवाई नहीं करने की सलाह दी है। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को सूखे से निपटने के लिए तत्काल राहत उपाय शुरू करने चाहिए। जिन खेतों में अभी फसल बची हुई है, उन्हें बचाने के लिए बिना रुकावट बिजली की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
धान के लिए ₹30 हजार, कपास-मिर्च के लिए ₹50 हजार मुआवजे की मांग
किसान संगठनों ने कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव को ज्ञापन सौंपकर फसल नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की है। उनकी मांग है कि सरकार:
- धान: 30,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे।
- कपास और मिर्च: 50,000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दे।
- सब्जियों और अन्य फसलों: 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
ज्ञापन देने वालों में तेलंगाना रायथु संघम, तेलंगाना स्टेट रायथु संघम, रायथु स्वराज्य वेदिका और तेलंगाना रायथंगा समिति के प्रतिनिधि शामिल थे। किसान संगठनों के मुताबिक, सूखे के कारण फसलें सूख रही हैं और पैदावार प्रभावित हो रही है। इससे किसानों के बीच चिंता और निराशा बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से प्रभावित मंडलों में फसल नुकसान का सर्वे कराने और जरूरत के अनुसार उन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।
17 प्रतिशत कम बारिश, कई जिलों में फसल प्रभावित
रायथु स्वराज्य वेदिका के रवि कन्नेगंती के मुताबिक, तेलंगाना में औसतन 740 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार राज्य में औसत से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि राज्य के 33 जिलों में से करीब आधे जिलों में खरीफ के दौरान कम बारिश हुई।
किसान संगठनों ने अल नीनो के प्रभाव और फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अध्ययन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सूखे की स्थिति का तत्काल सर्वे कराकर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाए, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द राहत मिल सके। संगठनों ने यह भी कहा कि कर्नाटक पहले ही 100 तालुकों और महाराष्ट्र 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुका है। उन्होंने तेलंगाना सरकार से भी प्रभावित क्षेत्रों में जल्द फैसला लेने की अपील की है।
रबी में वैकल्पिक फसलों के बीज देने की मांग
सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (CSA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीवी रामंजनेयुलु ने कहा कि सरकार ने किसानों को दालों जैसी वैकल्पिक फसलें उगाने की सलाह दी है। ऐसे में सरकार को पर्याप्त मात्रा में बीजों का भंडार तैयार करके किसानों को उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने राज्य में भूजल स्तर तेजी से गिरने पर चिंता जताई और किसानों के हितों की रक्षा के लिए लंबे समय की रणनीति बनाने की जरूरत बताई।
किसान संगठनों का कहना है कि सूखे की गंभीर स्थिति में रबी सीजन के दौरान फसल की बुवाई से छुट्टी यानी ‘क्रॉप हॉलिडे’ पर भी विचार करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों के साथ-साथ कृषि मजदूरों और पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले बटाईदार किसानों को भी आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।
फसल बीमा बहाल करने और MSP पर खरीद की मांग
किसान संगठनों ने राज्य सरकार से फसल बीमा योजना दोबारा शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि सूखे से जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उन्हें तत्काल राहत दी जाए और कम से कम 20,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिले।
इसके अलावा, सरकार से दालों, तिलहनों और मोटे अनाज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। किसान संगठनों के मुताबिक, इससे सूखे के समय किसानों को आर्थिक सहारा मिल सकता है।