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VB-G RAM G में फर्जी हाजिरी पर शिकंजा: शिवराज ने लॉन्च किया NMMS एप... नेटवर्क न होने पर भी दर्ज होगी उपस्थिति

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 23 Oct 2026 07:43 PM IST
सार

शिवराज सिंह चौहान ने नया NMMS एप लॉन्च किया है। इसमें AI आधारित चेहरे की पहचान, फर्जी हाजिरी रोकने और नेटवर्क नहीं होने पर भी उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया NMMS एप
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया NMMS एप - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण श्रमिकों की हाजिरी दर्ज करने के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) एप का नया संस्करण लॉन्च किया है। इसमें सुरक्षा के नए फीचर जोड़े गए हैं, ताकि फर्जी हाजिरी रोकी जा सके और श्रमिकों की मजदूरी सुरक्षित रहे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास की तकनीकी मदद से तैयार इस एप में चेहरे से पहचान की जांच को मजबूत किया गया है। नेटवर्क नहीं होने पर भी तय प्रक्रिया के तहत हाजिरी दर्ज की जा सकेगी।

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार देना, उनकी मजदूरी सुरक्षित रखना और सरकारी धन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि तकनीकी दिक्कतों या नेटवर्क की समस्या के कारण किसी वास्तविक श्रमिक को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

योजना के तहत 46 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार
मंत्री के मुताबिक, VB-G RAM G योजना को 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया गया है। इसके तहत अब तक 2.41 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्यस्थलों पर काम कराया गया है।

योजना के तहत 2.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। अब तक करीब 46 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। इनमें लगभग 40 करोड़ मानव-दिवस के लिए चेहरे से पहचान के जरिये हाजिरी दर्ज की गई है।

वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 95,692 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। राज्यों के हिस्से को मिलाकर कुल प्रावधान 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहली किस्त के रूप में 26,126 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी जा चुकी है।

चेहरे से पहचान के जरिए रुकेगी फर्जी हाजिरी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फर्जी हाजिरी और दूसरे व्यक्ति के नाम पर मजदूरी लेने की शिकायतों को रोकने के लिए सत्यापन व्यवस्था मजबूत की गई है। NMMS एप में मार्च 2026 से चेहरे से पहचान की सुविधा शुरू की गई थी। नए संस्करण में इसे और बेहतर बनाया गया है।

एप में डिवाइस की सुरक्षा जांच, सुरक्षित तरीके से डेटा भेजने और एप की नकल या उसमें छेड़छाड़ रोकने जैसे फीचर जोड़े गए हैं। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित चेहरे की पहचान और यह जांचने की सुविधा भी है कि कैमरे के सामने वास्तविक व्यक्ति मौजूद है या केवल पुरानी तस्वीर दिखाई जा रही है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड में कार्यस्थलों पर 100 फीसदी हाजिरी चेहरे से पहचान के माध्यम से दर्ज की जा रही है।

नेटवर्क नहीं होने पर भी दर्ज कर सकेंगे हाजिरी
सरकार ने एप में ऐसी व्यवस्था भी की है, जिससे नेटवर्क नहीं मिलने वाले क्षेत्रों में श्रमिकों की हाजिरी ऑफलाइन दर्ज की जा सकेगी। मस्टर रोल बंद होने के बाद, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, मोबाइल में नेटवर्क आने पर हाजिरी का रिकॉर्ड अपलोड किया जा सकेगा।

अगर बुजुर्ग श्रमिकों, दिव्यांगों या तकनीकी खराबी के कारण किसी व्यक्ति के चेहरे की पहचान नहीं हो पाती है, तो उसके लिए अपवाद व्यवस्था भी उपलब्ध है। ऐसे मामलों में मेट या संबंधित फील्ड कर्मचारी तय प्रक्रिया के तहत अनुरोध कर सकता है। मंत्री ने कहा कि तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि वास्तविक श्रमिकों को रोजगार या मजदूरी से वंचित करना।

मजदूरी भुगतान से पहले होगी कई स्तरों पर जांच
सरकार के मुताबिक, एप में हाजिरी दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि मजदूरी का भुगतान अपने आप हो जाएगा। भुगतान से पहले कई स्तरों पर जांच की जाती है। AI आधारित फोटो जांच प्रणाली एक जैसी या संदिग्ध तस्वीरों की पहचान करती है। ऐसी प्रविष्टियां मिलने पर जांच पूरी होने तक मजदूरी सूची और फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTO) रोके जा सकते हैं।

काम की वास्तविक मात्रा का रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका (e-MB) में दर्ज किया जाता है। तकनीकी इंजीनियर मौके पर किए गए काम की माप करते हैं और इसी के आधार पर मजदूरी की राशि तय होती है। इसके बाद निर्धारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रक्रिया से रकम श्रमिकों के बैंक खातों में भेजी जाती है।

काम की जांच के लिए जिलों में औचक निरीक्षण दल भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा सामाजिक अंकेक्षण और सार्वजनिक जानकारी साझा करने की व्यवस्था है। संदिग्ध या अनधिकृत ऐप के इस्तेमाल पर राज्यों को डिजिटल सबूत जुटाकर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

किसान आईडी बनाने का आंकड़ा 11 करोड़ के करीब
शिवराज सिंह चौहान ने किसान आईडी बनाने के अभियान की प्रगति की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि देश में अब तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इस तरह 11 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल 30 हजार आईडी और बनानी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तय लक्ष्य के अनुसार, दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि किसान आईडी से कृषि सेवाओं और सरकारी योजनाओं तक किसानों की पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी।
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