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Kharif 2026 Maize Soybean Yields Weak Which Could Impact Animal Feed And Poultry Sectors
खरीफ 2026: मक्का-सोयाबीन की पैदावार कमजोर, पशु आहार और पोल्ट्री सेक्टर पर पड़ सकता है असर
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 24 Oct 2026 08:50 AM IST
सार
महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे से मक्का और सोयाबीन उत्पादन घटने का अनुमान है। इससे मुर्गियों के दाने की कीमत और पोल्ट्री किसानों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सूखे का असर खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। इससे मक्का और सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट का अनुमान है। ये दोनों फसलें पशुपालन और पोल्ट्री उद्योग में पशु आहार व मुर्गियों के दाने के प्रमुख घटक हैं। ऐसे में इनकी पैदावार घटने से पोल्ट्री उद्योग की लागत बढ़ने की आशंका है।
भारत के पशुधन क्षेत्र के खरीफ 2026 के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, देश में मक्का का उत्पादन 232.09 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के अनुमान से 16.75 प्रतिशत कम है। वहीं, मक्का की खेती का रकबा 9.01 प्रतिशत घटकर 89.06 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है।
CLFMA ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी के मुताबिक, खरीफ 2026 में सोयाबीन का उत्पादन 124.06 लाख टन रहने का अनुमान है। यह खरीफ 2025 के सरकारी अनुमान 128.59 लाख टन से 3.52 प्रतिशत कम है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में मक्का उत्पादन पर ज्यादा असर
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का की पैदावार में गिरावट पोल्ट्री उद्योग के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि मुर्गियों के दाने में मक्का ऊर्जा देने वाला प्रमुख घटक है। अनुमानों के मुताबिक, महाराष्ट्र में मक्का उत्पादन 24.22 प्रतिशत घटकर 22.8 लाख टन रह सकता है। वहीं, कर्नाटक में उत्पादन 33.37 प्रतिशत गिरकर 34 लाख टन रहने का अनुमान है। इन दोनों राज्यों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और सूखे का असर देखा जा रहा है।
सोयाबीन उत्पादन में भी गिरावट की आशंका है। महाराष्ट्र में इसका उत्पादन 3.99 प्रतिशत घटकर 46.5 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं, देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में उत्पादन 10.43 प्रतिशत घटकर 53.2 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है।
मुर्गियों के दाने की लागत बढ़ने का खतरा
मक्का और सोयाबीन की उपलब्धता घटने से इनकी आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर पोल्ट्री उद्योग में इस्तेमाल होने वाले दाने की कीमतों पर पड़ सकता है। दिव्य कुमार गुलाटी के अनुसार, पोल्ट्री उत्पादन की कुल लागत में करीब 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा मुर्गियों के दाने का होता है। इसलिए फसलों की वास्तविक पैदावार, बाजार में नई फसल की आवक, अनाज की कीमतों और कच्चे माल की उपलब्धता पर नजर रखना जरूरी होगा।
इससे पोल्ट्री किसानों की लागत, चूजों की संख्या और कुल उत्पादन पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा सकेगा। हालांकि, ये शुरुआती अनुमान हैं। वास्तविक उत्पादन का पता फसल कटाई पूरी होने और बाजार में नई फसल की आवक के बाद ही चलेगा।
सोयाबीन उत्पादन पर एक अन्य अनुमान में भी गिरावट
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के पहले अनुमान में भी सोयाबीन उत्पादन घटने की बात कही गई है। संगठन के मुताबिक, देश में सोयाबीन उत्पादन पिछले साल के 110.25 लाख टन से 2.11 प्रतिशत घटकर 107.93 लाख टन रह सकता है।
यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब कुल बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है और मध्य प्रदेश व राजस्थान में बेहतर पैदावार के कारण उत्पादन में सुधार देखा गया है। हालांकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे के असर से इन राज्यों में हुई बढ़ोतरी का फायदा कम हो गया है और देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में मामूली गिरावट का अनुमान है। इस तरह मक्का और सोयाबीन की पैदावार पर मौसम का असर केवल फसल उत्पादकों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पशु आहार और पोल्ट्री उद्योग की लागत को भी प्रभावित कर सकता है।
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