चाय कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिली है। टी बोर्ड ने नई चाय फैक्ट्रियां लगाने और पहले से चल रही फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए जारी की गई नई गाइडलाइन पर फिलहाल रोक लगा दी है। बोर्ड ने यह फैसला कुन्नूर के चाय निर्माताओं के विरोध के बाद लिया है। चाय कारोबारियों का कहना था कि नई गाइडलाइन से नए निवेश और कारोबार शुरू करने के इच्छुक लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
टी बोर्ड के लाइसेंसिंग नियंत्रक समरेश मंडल ने 6 नवंबर को जारी आदेश में कहा कि नई गाइडलाइन तब तक लागू नहीं होगी, जब तक बोर्ड फैक्ट्रियों की कुल उत्पादन क्षमता और उपलब्ध हरी चाय पत्तियों (Green Leaf) के बीच तालमेल का आकलन पूरा नहीं कर लेता। अगले आदेश तक भी इन नियमों पर रोक जारी रहेगी।
नई फैक्ट्रियां लगाने पर लगी थी रोक
इससे पहले टी बोर्ड ने नई चाय फैक्ट्रियां स्थापित करने के लिए नए आवेदन लेने पर रोक लगाने से जुड़ी गाइडलाइन जारी की थी। इसके खिलाफ कुन्नूर के चाय निर्माताओं ने विरोध जताया था। कारोबारियों का कहना था कि इस तरह की पाबंदियों से बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होगी। नए उद्यमियों को कारोबार शुरू करने में परेशानी आएगी और चाय उद्योग में नए निवेश की संभावनाएं भी प्रभावित होंगी।
कारोबारियों ने कहा- नए निवेश को बढ़ावा दे सरकार
टी बोर्ड के फैसले का स्वागत करते हुए कुन्नूर के चाय निर्माताओं ने कहा कि सरकारी नीतियों का उद्देश्य नए कारोबारियों के लिए रास्ते आसान करना होना चाहिए, न कि उनके सामने बाधाएं खड़ी करना। उनका कहना है कि बेहतर कारोबारी माहौल मिलने से चाय उत्पादक जिलों के युवा और नए उद्यमी अपने क्षेत्र में ही फैक्ट्री लगा सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़ेगा और लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कारोबारियों के मुताबिक, नई फैक्ट्रियों से आधुनिक तकनीक और नई मशीनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे चाय की गुणवत्ता और उत्पादन के स्तर में सुधार होगा। इसका फायदा छोटे चाय उत्पादकों को भी मिल सकता है।
2030 तक 2,000 मिलियन किलो चाय उत्पादन का लक्ष्य
कारोबारियों ने कहा कि टी बोर्ड की नई गाइडलाइन का उद्देश्य कारोबार करना आसान बनाना (Ease of Doing Business) और वर्ष 2030 तक देश में 2,000 मिलियन किलो चाय उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टी बोर्ड ऐसी नीतियां बनाएगा, जिनसे नए निवेश को बढ़ावा मिले, चाय उत्पादक क्षेत्रों के लोगों को फायदा हो और भारतीय चाय उद्योग आगे बढ़ सके।
गौरतलब है कि कुन्नूर के चाय निर्माताओं ने पहले चेतावनी दी थी कि प्रस्तावित पाबंदियों से प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी। साथ ही नए निवेशक हतोत्साहित होंगे और हजारों छोटे चाय उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। कारोबारियों ने यह भी आरोप लगाया था कि नई गाइडलाइन जारी करने से पहले उद्योग से जुड़े लोगों से सलाह नहीं ली गई। उन्होंने बोर्ड से मांग की थी कि सभी पक्षों की चिंताओं पर विचार होने तक इन नियमों को लागू न किया जाए।
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