देश में चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुले बाजार में ई-नीलामी के जरिए चावल बेचने का लक्ष्य दोगुना कर दिया है। अब इसके तहत 50 लाख टन चावल बेचने की तैयारी है। पहले यह लक्ष्य 25 लाख टन था। इसके साथ ही सरकार ने 'भारत राइस' की बिक्री बढ़ाने और आम लोगों तक सस्ता चावल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच ई-नीलामी के जरिए 25 लाख टन चावल बेचा जा चुका है। पिछले साल इसी अवधि में यह बिक्री करीब 11 लाख टन थी। बिक्री में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने लक्ष्य बढ़ाने का फैसला किया है।
सरकार ने सहकारी संस्थाओं नेफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और केंद्रीय भंडार को देशभर में 'भारत राइस' की पहुंच बढ़ाने को कहा है। खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों में इसकी बिक्री बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इन संस्थाओं को चावल वितरण के नए रास्ते तलाशने के निर्देश भी दिए गए हैं। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही आम उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर चावल मिल सकेगा और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
एक साल में 12% महंगा हुआ चावल
देश में चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खुदरा बाजार में चावल की महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 8.25 फीसदी हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.89 फीसदी थी। सितंबर में चावल की औसत खुदरा कीमत करीब 48.23 रुपये प्रति किलो रही। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 12 फीसदी ज्यादा है।
सरकार का मानना है कि बाजार में चावल की पर्याप्त उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है। इसके लिए 'भारत राइस' योजना के तहत नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को अतिरिक्त चावल दिया जा रहा है।
धान की कम बुवाई और बारिश की कमी से बढ़ीं कीमतें
इस साल चावल की कीमतें बढ़ने के पीछे खरीफ सीजन में धान की कम बुवाई और कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसका असर खासतौर पर प्रीमियम गैर-बासमती चावल की कीमतों पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026-27 में धान का कुल रकबा करीब 4 फीसदी घटकर 426.8 लाख हेक्टेयर रह गया है। कई राज्यों में बारिश की कमी इसकी प्रमुख वजह रही है।
व्यापारियों को हर शुक्रवार बताना होगा चावल का स्टॉक
चावल की जमाखोरी रोकने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों, प्रोसेसर और राइस मिलों को अपने स्टॉक की जानकारी देने का निर्देश दिया है। अब सभी संबंधित कारोबारियों को हर शुक्रवार ऑनलाइन पोर्टल पर चावल और धान के स्टॉक का ब्योरा देना होगा। इसमें बासमती, प्रीमियम गैर-बासमती, सामान्य गैर-बासमती, उसना चावल, टूटे चावल और धान का स्टॉक शामिल होगा।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को जरूरत पड़ने पर धान और चावल पर स्टॉक लिमिट लगाने की अनुमति दी गई है। यानी इन राज्यों की सरकारें तय कर सकेंगी कि व्यापारी और कारोबारी अधिकतम कितना चावल या धान अपने पास रख सकते हैं। यह व्यवस्था लागू होने पर 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी।
खरीफ चावल उत्पादन का अनुमान आने में देरी
सरकार ने अभी खरीफ सीजन 2026-27 के चावल उत्पादन का पहला आधिकारिक अनुमान जारी नहीं किया है। हालांकि, कारोबारियों और उद्योग जगत ने इस सीजन में चावल उत्पादन 112 से 115 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है। गौरतलब है कि खरीफ सीजन 2025-26 में देश में 124.76 मिलियन टन चावल का उत्पादन हुआ था। इस बार धान का रकबा घटने और बारिश की कमी के कारण उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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