Home›Khabar Junction›
Alerts Will Be Given Before Storms And Cyclones Government Use Ai Accurately Predict Weather Benefiting Farmer
तूफान-चक्रवात से पहले मिलेगा अलर्ट: AI से मौसम का सटीक अनुमान लगाएगी सरकार, किसानों-मछुआरों को फायदा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 07 Nov 2026 09:07 AM IST
सार
AI Weather Forecast: सरकार मिशन मौसम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाएगी। इससे किसानों, मछुआरों और तटीय इलाकों के लोगों को चक्रवात और खराब मौसम की पहले चेतावनी मिल सकेगी।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच सरकार विज्ञान और नई तकनीक का फायदा आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। खासतौर पर समुद्र किनारे रहने वाले लोगों, मछुआरों और कमजोर समुदायों को मौसम से जुड़ी सटीक जानकारी और समय पर चेतावनी देने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार मौसम की निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और समुद्र से जुड़े शोध को मजबूत कर रही है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सचिव टी. श्रीनिवास कुमार ने यह बात ICAR-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में कही। इस कार्यक्रम में मत्स्य पालन और रिमोट सेंसिंग (दूर से किसी क्षेत्र की निगरानी करने वाली तकनीक) पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि वैज्ञानिक शोध और तकनीकी विकास का फायदा केवल संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका लाभ आम लोगों और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित समुदायों को भी मिले।
गहरे समुद्र में शोध के लिए डीप ओशन मिशन
टी. श्रीनिवास कुमार ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि डीप ओशन मिशन के तहत समुद्र की गहराई में मौजूद संसाधनों की खोज, स्वदेशी तकनीक का विकास और समुद्र की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
इसके अलावा 'पृथ्वी विज्ञान' (PRITHVI) कार्यक्रम के तहत वायुमंडल, महासागर, बर्फीले क्षेत्रों और धरती की आंतरिक संरचना से जुड़े शोध को एक साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य मौसम, जलवायु, समुद्र और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी सेवाओं को बेहतर बनाना है।
AI से मिलेगी मौसम की ज्यादा सटीक जानकारी
सरकार के 'मिशन मौसम' का उद्देश्य भारत को मौसम के लिहाज से अधिक तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक देश बनाना है। इसके लिए मौसम निगरानी केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाने, मौसम के पूर्वानुमान वाले मॉडल को बेहतर बनाने, सुपरकंप्यूटर और AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल करने पर काम किया जा रहा है।
इससे मानसून, चक्रवात और खराब मौसम की पहले से अधिक सटीक जानकारी मिलने की उम्मीद है। साथ ही किसानों, मछुआरों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर चेतावनी मिल सकेगी। इससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
ब्लू इकोनॉमी से बढ़ेंगे मछुआरों के अवसर
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ब्लू इकोनॉमी (समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रहा है। इसके तहत समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह करने पर जोर है, जिससे मत्स्य पालन, तटीय क्षेत्रों में रोजगार और समुद्री पर्यावरण का संरक्षण एक साथ हो सके। इस पहल का उद्देश्य समुद्र की सेहत को नुकसान पहुंचाए बिना मछुआरों की आजीविका मजबूत करना और समुद्री संसाधनों का टिकाऊ इस्तेमाल करना है।
कोच्चि घोषणा में समुद्री आंकड़े साझा करने पर जोर
संगोष्ठी में समुद्री पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन और दूसरी चुनौतियों से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई गई। इस दौरान 'कोच्चि घोषणा' (Kochi Declaration) को अपनाया गया। इस घोषणा में कई देशों के सहयोग से एक साझा समुद्री निगरानी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही समुद्र से जुड़े आंकड़ों को सभी देशों के लिए मुफ्त, खुला और समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
घोषणा में पुराने समुद्री आंकड़ों को सुरक्षित रखने और उनका सही तरीके से रिकॉर्ड तैयार करने की जरूरत भी बताई गई। इसे आगे विचार और नीतिगत कार्रवाई के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव को सौंपा गया।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।