कश्मीर के सेब उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। दक्षिण भारत के बाजारों में कश्मीरी सेब की मांग बढ़ रही है। खासकर अच्छी गुणवत्ता वाले प्रीमियम सेब की मांग में तेजी आई है। इसकी एक बड़ी वजह भारतीय बाजार में ईरान से आने वाले सेब की सप्लाई कम होना है। कारोबारियों के मुताबिक, ईरान से सेब की आवक प्रभावित होने से कश्मीरी सेब को बाजार में बेहतर मौका मिल रहा है।
चेन्नई और केरल के बाजारों में कश्मीरी सेब की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। इन बाजारों में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब पसंद किए जाते हैं। शोपियां फल मंडी के अध्यक्ष और सेब कारोबारी मोहम्मद अशरफ वानी के मुताबिक, ईरानी सेब की उपलब्धता कम होने से कश्मीरी सेब की मांग बढ़ी है। उन्होंने बिजनेस लाइन को बताया कि मौजूदा सीजन में कश्मीर से रोजाना करीब 24 हजार टन सेब देश के अलग-अलग थोक बाजारों में भेजा जा रहा है।
ईरान से सप्लाई घटी तो कश्मीरी सेब को मिला फायदा
कारोबारियों का कहना है कि ईरान से जुड़े संघर्ष का असर वहां से भारत आने वाले सेब की सप्लाई पर पड़ा है। पहले ईरानी सेब भारतीय बाजार में कश्मीरी सेब को कड़ी टक्कर देते थे। खासकर प्रीमियम श्रेणी में दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा रहती थी। अब ईरानी सेब की उपलब्धता घटने से कश्मीरी सेब के लिए बाजार में जगह बढ़ी है।
कुछ कारोबारियों ने यह आरोप भी लगाया है कि पहले ईरानी सेब अफगानिस्तान के रास्ते भारतीय बाजार में पहुंचते थे और उन्हें अफगानी सेब बताकर बेचा जाता था। इससे आयात शुल्क से बचने और कम कीमत पर सेब बेचने में मदद मिलती थी। हालांकि, यह कारोबारियों का दावा है।
कोल्ड स्टोरेज से लंबे समय तक मिल रहे सेब
कश्मीरी सेब की मांग बनाए रखने में कोल्ड स्टोरेज की भी अहम भूमिका है। अब किसान और कारोबारी अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को नियंत्रित वातावरण वाले भंडारण केंद्रों (CA Storage) में रख रहे हैं। इससे फसल कटाई का सीजन खत्म होने के बाद भी बाजार में सेब की सप्लाई जारी रखी जा सकती है।
जम्मू-कश्मीर फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रोसेसिंग एंड इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एसोसिएशन (JKPICCA) के प्रवक्ता इजहान जावेद के मुताबिक, CA स्टोरेज में करीब 5 से 6 लाख टन सेब रखा गया है। इसमें A-ग्रेड और B-ग्रेड दोनों तरह के सेब शामिल हैं।
कई महीनों तक सुरक्षित रहते हैं सेब
CA स्टोरेज में तापमान और हवा की स्थिति को नियंत्रित रखा जाता है। इससे सेब कई महीनों तक सुरक्षित रहते हैं और उनकी गुणवत्ता भी बनी रहती है। किसानों को कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी नहीं रहती। इस व्यवस्था से किसान और कारोबारी बाजार की मांग और कीमतों को देखकर सेब बेच सकते हैं। इससे उन्हें बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ती है। मोहम्मद अशरफ वानी के मुताबिक, दक्षिण भारत के बाजारों में कश्मीरी सेब की मांग में सुधार हुआ है। खासकर प्रीमियम गुणवत्ता वाले सेब के लिए बेहतर बाजार मिलने से किसानों और कारोबारियों को फायदा हो रहा है।