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Home› Khabar Junction› El Nino Will Reduce World Rice Production Prices May Remain High Until 2027

El Nino Impact: अल नीनो से घटेगा दुनिया में चावल का उत्पादन, 2027 तक महंगे रह सकते हैं दाम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 04 Nov 2026 03:18 PM IST
सार

अल नीनो के असर से 2026-27 में वैश्विक चावल उत्पादन 2.4 फीसदी घटने का अनुमान है। भारत में भी उत्पादन 4.6 फीसदी कम हो सकता है। जानें चावल की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

चावल
चावल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दुनियाभर में चावल की कीमतें अगले कुछ महीनों तक ऊंची रह सकती हैं। इसकी बड़ी वजह अल नीनो का असर है। मौसम की इस स्थिति से भारत समेत दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बारिश कम होने और धान की पैदावार घटने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की कृषि बाजार सूचना प्रणाली (AMIS) ने भी चावल उत्पादन पर इसके असर को लेकर चिंता जताई है।

रिसर्च एजेंसी BMI के मुताबिक, चावल के वायदा भाव में उम्मीद से ज्यादा तेजी आई है। इसी वजह से एजेंसी ने 2026 के लिए चावल के औसत भाव का अनुमान 12.9 डॉलर से बढ़ाकर 14 डॉलर प्रति सौ पाउंड (करीब 45.36 किलो) कर दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही में भाव औसतन 17.5 डॉलर रह सकते हैं। वहीं, 2027 की पहली तिमाही में यह औसत 17.2 डॉलर के बजाय 17.2? 

दो साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचे चावल के दाम
वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें फिलहाल करीब दो साल के उच्च स्तर पर हैं। जुलाई के बाद से भारत और पाकिस्तान के निर्यात भाव में 20 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, थाईलैंड और वियतनाम में कीमतें 30 डॉलर प्रति टन तक बढ़ी हैं।

FAO की AMIS रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के कारण 2026-27 सीजन में दुनिया का चावल उत्पादन 2.4 फीसदी घटकर 55.247 करोड़ टन रहने का अनुमान है। भारत, पाकिस्तान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया में धान की फसल पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

भारत में चावल उत्पादन 4.6 फीसदी घटने का अनुमान
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने 2026 में भारत का चावल उत्पादन 14.7 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले साल के मुकाबले 4.6 फीसदी कम है। इससे पहले उत्पादन 15 करोड़ टन रहने का अनुमान था। थाईलैंड में भी चावल उत्पादन 1.9 फीसदी घटकर 2.03 करोड़ टन रहने की संभावना है। पानी की कमी की आशंका को देखते हुए वहां सरकार किसानों को धान की खेती का रकबा कम करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

अल नीनो से हर साल घट सकता है चावल उत्पादन
FAO के ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, अल नीनो वाले वर्षों में दुनिया का धान उत्पादन औसतन करीब 96 लाख टन कम रह सकता है। यह अनुमानित वैश्विक उत्पादन का लगभग 1.2 फीसदी है। हालांकि, संगठन का कहना है कि चावल उत्पादन में गिरावट के लिए अल नीनो ही एकमात्र कारण नहीं है।थाईलैंड में बाढ़ के कारण चावल की ढुलाई भी प्रभावित हुई है। इससे बुवाई में देरी और फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ी है।

निर्यात और परिवहन लागत भी बढ़ा रही दबाव
वैश्विक बाजार में चावल की कीमतों पर केवल मौसम का असर नहीं है। माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ने से निर्यात महंगा हो रहा है। वहीं, अफ्रीकी देशों से चावल की मांग बढ़ने के कारण भी बाजार पर दबाव है।

हालांकि, BMI का मानना है कि वायदा बाजार में आई तेजी का मतलब यह नहीं है कि दुनिया में चावल की वास्तविक उपलब्धता में उतनी ही बड़ी कमी आ गई है। भारत और थाईलैंड जैसे प्रमुख निर्यातक देशों में फसल की कटाई शुरू होने या करीब आने से अल नीनो के कारण आगे होने वाले नुकसान का जोखिम भी धीरे-धीरे कम हो रहा है।
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