त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में गन्ना पेराई समय से 15 दिन पहले शुरू करने का फैसला लिया गया है। 15 दिन पहले पेराई सीजन शुरू करने के कदम का किसान संगठन और मिल विरोध कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, समय से पहले गन्ना कटाई करने से प्रति एकड़ करीब 40 हजार रुपये का नुकसान उठाना होगा। दूसरी तरफ कटाई जल्दी होने से मिलों को चीनी की रिकवरी रेट में गिरावट से घाटे का अनुमान है।
केंद्र का निर्देश और चीनी की कीमतों में उछाल
सरकार के अनुसार, यह आदेश केंद्र सरकार की तरफ से आया है। दरअसल, अगस्त महीने में चीनी की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन चीनी आयात करने का भी निर्णय लिया था। केंद्र ने महाराष्ट्र जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अक्टूबर से ही पेराई शुरू कर दें, ताकि नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू होने वाले दिवाली त्योहार से पहले बाजार में चीनी का नया स्टॉक आ सके।
किसानों और मिल मालिकों को होगा भारी नुकसान
किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने इस फैसले के खिलाफ किसानों के साथ मिलकर आवाज उठाई है। उन्होंने बताया कि अगर गन्ना पूरी तरह पकने से पहले काटा जाता है, तो उसका वजन कम निकलता है। इससे किसानों को प्रति टन 450 से 500 रुपये का घाटा सहना पड़ेगा, जो पिछले साल के मुकाबले प्रति एकड़ करीब 40,000 रुपये बैठेगा। शेट्टी ने मांग की है कि ऐसी स्थिति में सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
दूसरी तरफ, महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज फेडरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष पी.आर. पाटिल के अनुसार, 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने पर गन्ने से चीनी की रिकवरी (मात्रा) 1 प्रतिशत कम हो जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि प्रति टन गन्ने में मिलों को 10 किलो कम चीनी मिलेगी। फैक्ट्रियों में चीनी की औसत बिक्री कीमत 37 से 40 रुपये प्रति किलो होती है, जिसके हिसाब से मिलों को प्रति टन 370 से 400 रुपये का नुकसान होगा और पूरे सीजन में यह घाटा करोड़ों रुपये तक पहुंच जाएगा।
उत्पादन का अनुमान और नेताओं की अपील
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर को मुख्यमंत्री के समक्ष पेश की गई कृषि और सहकारिता विभागों की रिपोर्ट में कहा गया है कि आगामी सीजन में पेराई के लिए 9.9 करोड़ (99 मिलियन) मीट्रिक टन गन्ना उपलब्ध होगा। एथेनॉल उत्पादन के लिए 15 लाख मीट्रिक टन गन्ना देने के बाद भी 96.4 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होगा।
हालांकि, किसान नेता राजू शेट्टी ने सरकार के इन आंकड़ों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से महाराष्ट्र में कुल चीनी उत्पादन में करीब 18 लाख (1.8 मिलियन) मीट्रिक टन की कमी आएगी। राजस्व घटने के कारण चीनी मिलें किसानों को कम भुगतान कर पाएंगी।
राजू शेट्टी ने हर्षवर्धन पाटिल, विनय कोरे, जयंत पाटिल, विश्वजीत कदम और एनसीपी मंत्री हसन मुश्रीफ जैसे चीनी उद्योग के विशेषज्ञों और मिल मालिकों से मुलाकात कर 15 अक्टूबर से पेराई शुरू न करने की अपील की है। फेडरेशन के अध्यक्ष पाटिल ने बताया कि चीनी मिल संघ ने राज्य सरकार से लिखित रूप में 1 नवंबर से पेराई शुरू करने का अनुरोध किया था। लेकिन केंद्र सरकार नवंबर के त्योहारी सीजन से पहले नया स्टॉक चाहती है, इसलिए राज्य सरकार अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग है।