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Rabi Season: सरसों के लिए खेत तैयार करने का सही तरीका, बीज से खाद तक रखें इन बातों का ध्यान...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 28 Sep 2026 08:57 AM IST
सार

  • सितंबर के अंत से सरसों की बिजाई शुरू करने की सलाह
  • किसानों को उन्नत किस्मों के चयन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया
  • तना गलन से बचाव के लिए बीजोपचार जरूरी
  • सिंचित और बारानी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग बीज व उर्वरक मात्रा बताई गई
  • मधुमक्खियों को नुकसान से बचाने के लिए शाम 3 बजे के बाद छिड़काव की सलाह

 

सरसों के लिए खेत तैयार करने का सही तरीका
सरसों के लिए खेत तैयार करने का सही तरीका - फोटो : AI Image
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विस्तार
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कृषि विशेषज्ञों ने रबी सीजन में उगाई जाने वाली प्रमुख फसल सरसों की बिजाई के लिए किसानों को अभी से खेत तैयार करने की सलाह दी है। सितंबर के अंत में सरसों की बिजाई शुरू हो जाती है, जिसके तहत तोरिया, राया, तारामीरा, भूरी और पीली सरसों बोई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही किस्म का चुनाव और बीजोपचार करके किसान फसल से अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं।

उन्नत किस्मों का चुनाव
सरसों अनुभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामअवतार के अनुसार, किसानों को राया-सरसों की आरएच-30, आरएच 8812, आरएच 406, आरएच 0749, आरएच 725, आरएच 761, आरएच 1424, आरएच 1706 और पीली सरसों की वाई एसएच 0401 किस्म ही बोनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए एक नई उन्नत किस्म आरएच 1975 विकसित की है। इसके अलावा सिंचित क्षेत्रों के लिए सरसों की हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 भी तैयार की गई है।

बीजोपचार और बिजाई का सही तरीका
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज के अनुसार, फसल को तना गलन रोग से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजों का उपचार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज में दो ग्राम कार्बेन्डाजिम दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। सिंचित क्षेत्रों में एक एकड़ के लिए एक किलोग्राम और बारानी यानी असिंचित क्षेत्रों में सवा किलोग्राम बीज का उपयोग करना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक बिजाई पोरा विधि से कतारों में 45 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए। किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बीज तीन से चार सेंटीमीटर से ज्यादा गहराई में न जाए।

उर्वरक और खाद का सही उपयोग
उर्वरकों के इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञों ने बताया कि सिंचित सरसों में बिजाई के समय 35 किलोग्राम यूरिया और 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट प्रति एकड़ डालना चाहिए। बची हुई 35 किलोग्राम यूरिया पहली सिंचाई के समय देनी चाहिए। बारानी इलाकों के लिए 35 किलोग्राम यूरिया और 50 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट की सिफारिश की गई है। यदि किसान फास्फोरस के लिए डीएपी का उपयोग करते हैं, तो खेत तैयार करते समय ही 100 किलोग्राम जिप्सम प्रति एकड़ भुरभुरी मिट्टी में मिला देना चाहिए। जमीन में जस्ते की कमी होने पर बिजाई के समय 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट को 20 से 25 किलोग्राम सूखी मिट्टी में मिलाकर डालना चाहिए। इसके साथ ही राया सरसों में एजोटोबैक्टर के टीके का प्रयोग भी फायदेमंद बताया गया है।

कीटनाशक छिड़काव का सही समय

सरसों की अगेती और पछेती दोनों फसलों में कई तरह की बीमारियों का खतरा रहता है। कृषि जानकारों का कहना है कि किसान समय रहते बीमारी की पहचान कर आसानी से उनकी रोकथाम कर सकते हैं। फसल पर कीटनाशकों का छिड़काव हमेशा दोपहर बाद यानी शाम तीन बजे के बाद ही करना चाहिए। ऐसा करने से खेतों में आने वाली मधुमक्खियों को कोई नुकसान नहीं होता है और ये मधुमक्खियां फसल की पैदावार बढ़ाने में बेहद सहायक मानी जाती हैं।


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