इस मानसून सीजन उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की दो तस्वीरें देखने को मिली है। एक तरफ प्रदेश के 26 जिलों में मानसूनी बारिश सामान्य से 120 प्रतिशत ज्यादा दर्ज दर्ज की गई है, जबकि 19 जिलों में बारिश सामान्य से 80 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई है। दूसरी और बीते तीन दिनों के दौरान हुई भारी बारिश ने कई जिलों में फसल नुकसान की संभावना को जन्म दिया है। खेत में जलभराव होने से रबी फसलों की बुवाई में भी समस्या आने के आसार बने हुए हैं।
जिलों के हिसाब से बारिश के वितरण में भारी असमानता दिखाई देती है, लेकिन प्रदेश स्तर पर बात करें तो इस मानसूनी सीजन में सामान्य से 7.7 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
आपके जिले में कैसी हुई बारिश
कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि, चार जिलों में सामान्य से 40 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है। इनमें पश्चिमी हिस्से का शामली (31.8 प्रतिशत), पूर्वी हिस्से का देवरिया (32 प्रतिशत), गाजियाबाद (36.4 प्रतिशत) और कुशीनगर (39.6 प्रतिशत) शामिल हैं। इसके अलावा 40 से 60 प्रतिशत बारिश वाले क्षेत्रों में भदोही, जौनपुर, कानपुर देहात, हापुड़, मऊ, पीलीभीत, अलीगढ़ और मथुरा शामिल हैं। वहीं सिद्धार्थनगर, मैनपुरी, गौतमबुद्ध नगर, सहारनपुर, कौशांबी, अमेठी और संत कबीर नगर में 60 से 80 प्रतिशत तक ही बारिश हुई है।
इन जिलों में जमकर हुई मानसूनी बारिश
इसके ठीक उलट, जून से अब तक कई जिलों में भारी बारिश हुई है। सम्भल में सामान्य की 195 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद महोबा में 191.2 प्रतिशत, हमीरपुर में 186.4 प्रतिशत, कानपुर नगर में 178 प्रतिशत, बांदा में 177.3 प्रतिशत और चित्रकूट में 174.8 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है।
मानसून ने किसानों के लिए अलग-अलग चुनौतियों को जन्म दिया
बारिश का यह अंतर किसानों के लिए चुनौती भी अलग-अलग तरह की ला रह है, जैसे ज्यादा बारिश वाले जिलों में सीजन के आखिरी चरण में हो रही भारी बारिश धान और दूसरी खरीफ फसलों कटाई और उन्हें सुखाने के मोर्चे पर दिक्कत पैदा कर सती है। वहीं, कम बारिश वाले जिलों में नमी की कमी के चलते किसानों को सिंचाई के लिए पंप पर ज्यादा निर्भर होने पड़ रहा है।